JHARKHAND NEWS : अब झारखंड में गूंजेगा AI का डंका! नई नीति लाएगी पढ़ाई और नौकरियों की बहार
आज पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की ओर तेजी से बढ़ रही है। हेल्थ हो या बैंकिंग, मैन्युफैक्चरिंग हो या कृषि—हर सेक्टर में AI का डंका बज रहा है। और अब, इसी रेस में कदम से कदम मिलाने के लिए हमारा झारखंड भी पूरी तरह तैयार है! राज्य सरकार झारखंड को पूर्वी भारत का प्रमुख AI और IT हब बनाने के मिशन में जुट गई है।झारखंड सरकार ने 'एआई पॉलिसी 2026' का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जो अगले 5 सालों (2026-2031) के लिए राज्य की सूरत बदलने वाला है। इस नीति को रफ्तार देने के लिए नई दिल्ली में 8 और 9 जुलाई 2026 को एक बड़े 'नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन' का आयोजन किया गया है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर रांची आईटी पार्क को बड़े निवेश के रूप में पेश किया गया है। आपको बता दें कि यह आईटी पार्क राजधानी रांची के कोर कैपिटल एरिया में करीब 100.97 एकड़ भूमि पर विकसित किया जा रहा है।""इस पॉलिसी के तहत प्रशासन, कृषि और स्वास्थ्य में AI का इस्तेमाल तो होगा ही, साथ ही युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए राज्य के चार आईटीआई (ITI) में AI की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा मार्च 2025 में ही की थी, लेकिन अब इसे धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
सरकार मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक 'स्टेट एआई मिशन' का गठन करने जा रही है, जिसकी नोडल एजेंसी 'जैप-आईटी' (Jhap-IT) होगी। इतना ही नहीं, 'इंडिया एआई' की तर्ज पर राज्य का अपना 'झारखंड एआई क्लाउड' भी विकसित किया जाएगा।"रांची के हेहल आईटीआई के प्रभारी प्राचार्य परमानंद रजक का कहना है कि निर्देश मिलते ही संसाधन जुटाकर पढ़ाई शुरू कर दी जाएगी। वहीं कर्मचारी संघ के महासचिव कमलेश्वर रविदास ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि—यह समय की मांग है। अगर एआई की पढ़ाई झारखंड में ही मिलने लगेगी, तो हमारे बच्चों को पढ़ाई के लिए राज्य से बाहर नहीं भटकना पड़ेगा। ""साफ है कि देरी भले ही हुई हो, लेकिन झारखंड सरकार की यह नई नीति राज्य के युवाओं के लिए असीम संभावनाओं के द्वार खोलने वाली है। देखना होगा कि यह एआई पॉलिसी झारखंड को विकास की किस नई ऊंचाई पर ले जाती है।