JHARKHAND NEWS : गजब का चयन: OMR में सिर्फ 19 प्रश्नों के गोले भरे, फिर भी बन गए अधिकारी—JPSC परीक्षा पर उठे बड़े सवाल!
अलग राज्य के गठन के बाद हर ओर बस एक ही उम्मीद थी—अपनी सरकार होगी, अपना विकास होगा और युवाओं को रोजगार मिलेगा। लेकिन यह उम्मीदें उस वक्त दम तोड़ने लगीं, जब व्यवस्था में भ्रष्टाचार की दीमक लग गई। और इसका सबसे बड़ा खमियाजा भुगता यहाँ के मासूम और मेहनतकश छात्रों ने।जेपीएससी यानी झारखंड लोक सेवा आयोग की दूसरी सिविल सेवा परीक्षा की फाइलों से अब एक-एक कर सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं।सीबीआई की जांच में जो रिपोर्ट सामने आई है, उसने सबको हिलाकर रख दिया है।नियमों की सरेआम धज्जियां: 2004 की इस परीक्षा में 172 पदों के लिए विज्ञापन निकला था। नियम के मुताबिक प्रारंभिक परीक्षा में 1,720 छात्र पास होने चाहिए थे, लेकिन आयोग ने 16,314 उम्मीदवारों को सफल घोषित कर दिया। मुख्य परीक्षा में भी अधिकतम 516 छात्र चुने जाने चाहिए थे, लेकिन पास कर दिए गए 804 लोग।
कम गोले, भारी अंक: सीबीआई की रिपोर्ट बताती है कि ओएमआर शीट में जिन अभ्यर्थियों ने बेहद कम गोले भरे, उन्हें भी भर-भरकर नंबर दिए गए।तत्कालीन जेपीएससी सदस्य गोपाल सिंह के बेटे कुंदन कुमार सिंह ने ओएमआर में सिर्फ 19 गोले भरे थे, लेकिन रिजल्ट में उन्हें 88 अंक दे दिए गए और उनका चयन भी हो गया।मौसमी नागेश ने सिर्फ 50 गोले भरे, लेकिन उन्हें 69 अंक दे दिए गए और सामान्य अध्ययन में सीधे 55 अंक बढ़ा दिए गए।टेक्निकल खेल: जिस ओएमआर स्कैनिंग मशीन का इस्तेमाल हुआ, उसमें अपनी कोई मेमोरी ही नहीं थी। साजिशकर्ताओं ने जेपीएससी के स्ट्रॉन्ग रूम में निजी कंप्यूटर का इस्तेमाल कर मनचाहे बदलाव किए और जब वो भागे, तो वो कंप्यूटर भी साथ लेते गए जो आज तक सीबीआई को नहीं मिला है।इस पूरे खेल में नेताओं और रसूखदारों के रिश्तेदारों की लंबी फौज सामने आई है:
तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो के भाई मुकेश कुमार महतो
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के निजी सहायक कानू राम नाग और दूर के रिश्तेदार हरिहर सिंह मुंडा
तत्कालीन महाधिवक्ता अनिल सिन्हा के भतीजे रोहित सिन्हा
तत्कालीन विधायक प्रदीप यादव के रिश्तेदार प्रशांत लायक और तत्कालीन विधायक व वर्तमान केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी के रिश्तेदार रामकृष्ण कुमार
वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मूल्यांकनकर्ता प्रोफेसर ने कोर्ट में यह स्वीकार किया कि उन्होंने परमानंद सिंह और अरविंद कुमार सिंह के दबाव में आकर नंबर बढ़ाए थे।हालाँकि जेपीएससी के चेयरमैन इस्तीफा दे चुके हैं, परीक्षा नियंत्रक जेल जा चुके हैं और कई बड़े नाम बेनकाब हो चुके हैं—लेकिन सवाल यह है कि सीबीआई ने नेताओं और आयोग के लोगों के रिश्तेदारों को तो ढूंढ निकाला, पर किन बड़े अफसरों की पैरवी पर किसकी नियुक्तियां हुईं, इसकी जाँच आज भी अंधेरे में क्यों है?