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JHARKHAND NEWS : गुरु बाजपुर गांव में किसान सभा का आयोजन, अदरक की उन्नत खेती में नैनो उर्वरकों के महत्व पर हुई चर्चा

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Ranchi : रांची के गुरु बाजपुर गांव में शनिवार को प्रातः कालीन किसान सभा का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में इफको, रांची से प्रक्षेत्र प्रबंधक चंदन कुमार, प्रशिक्षु प्रवल सिंह एवं एमडी अमरजीत अमर उपस्थित रहे. कार्यक्रम में विशेष रूप से बाजपुर गांव के लगभग 70 अदरक उत्पादक किसानों के साथ स्थानीय उर्वरक विक्रेता चौधरी बीज भंडार के दीपक कुमार ने भाग लिया.

रातू प्रखंड के आसपास के गाँवों में अदरक की खेती बहुतायत से होती है. परन्तु विगत वर्षों में अदरक के बुवाई उपरांत मिट्टी एवं बीज जनित रोग राइजोम रॉट (Rhizome Rot), बैक्टीरियल विल्ट (Bacterial Wilt) एवं लीफ स्पॉट (Leaf Spots) का आक्रांत होने के कारण आज किसान इसकी खेती सीमित करते जा रहे हैं. अदरक एक नगदी फ़सल है और इसकी सफल एवं उन्नत खेती किसानों के लिए बहुत लाभदायक होता है. ऐसे में आज इफको द्वारा किसानों के बीच बैठक कर इसके रोग मुक्त खेती के बारे में विस्तार से चर्चा किया गया और बताया गया कि कैसे रासायनिक दानेदार उर्वरकों का अन्धाधुन्ध प्रयोग, मिट्टी की जीवाश्म कार्बन में ह्रास,बढ़ती अम्लीयता और घटते लाभकारी सूक्ष्म जीवों के कारण खेती में समस्याएं बढ़ रही है. ऐसे में उन्नत बीजों के प्रयोग और कई तरह के रसायनों के प्रयोग करने के बावजूद वांछित और गुणकारी उत्पादन नहीं मिल रहा है और खेती महँगी होती जा रही है जो किसानों को खेती से विमुख कर रहा है.

सभा के दौरान किसानों को अदरक की उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई. अदरक फसल में होने वाली प्रमुख बीमारियों जैसे राइजोम रॉट (Rhizome Rot),बैक्टीरियल विल्ट (Bacterial Wilt)एवं लीफ स्पॉट (Leaf Spots)से बचाव के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई और बुवाई से लेकर कन्दों के बैठने तक के चरण में किए जाने वाले विभिन्न कृषि कार्यों एवं इसमें दिए जाने वाले आवश्यक खाना एवं दवा की विस्तृत जानकारी दी गई.

इसके साथ ही किसानों को अदरक की बुवाई से पूर्व नैनो डीएपी के माध्यम से कंद उपचार की विधि के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई. खड़ी फसल में नैनो उर्वरकों के उचित एवं संतुलित छिड़काव की तकनीक को भी विस्तारपूर्वक समझाया गया,जिससे फसल की वृद्धि एवं उत्पादन में सुधार किया जा सके.

उन्हें विभिन्न तरह के जैविक उत्पाद जैसे ट्राइकोड्रमा,माइकोराइजा,सूडोमोनस,स्फुर घोलक बैक्टीरिया एवं जैव अपघटक के प्रयोग तथा चूने,डालोमाइट का खेतों में प्रयोग कर मिट्टी को सशक्त करते हुए रोग और व्याधि मुक्त उन्नत एवं लाभकारी खेती की जा सकती है की भी विस्तार से चर्चा की गई.

कार्यक्रम के दौरान किसानों ने नैनो उर्वरकों के उपयोग को लेकर गहरी रुचि दिखाई तथा कुछ किसानों ने नैनो उर्वरकों के अपने फसलों में प्रयोग के लाभकारी परिणाम के अनुभव को भी साझा किया. स्थानीय विक्रेता ने सभी किसानों से आग्रह करते हुए कहा कि आप सभी अपनी खेती में इन सभी का प्रयोग करें और इसकी समय से उपलब्धता की जिम्मेदारी मैं लेता हूं.