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JHARKHAND NEWS : झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ग्रेजुएट ट्रेंड टीचरों को मिलेगा समान वरीयता और अपग्रेड वेतन का लाभ

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झारखंड के सरकारी शिक्षकों के लिए हाईकोर्ट से एक राहत भरी खबर है। साल 2016 की स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा से जुड़े अभ्यर्थियों को अदालत ने एक बड़ा तोहफा दिया है। माननीय हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि प्रशासनिक देरी का खामियाजा शिक्षक नहीं भुगतेंगे .जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि प्रभावित शिक्षकों को समान वरीयता (Seniority), अपग्रेड वेतन और अन्य सभी सेवा लाभ दिए जाएं। और हां, इसके लिए सरकार को केवल 12 सप्ताह यानी 3 महीने का समय दिया गया है। अदालत ने याचिकाओं को स्वीकार करते हुए साफ कहा कि सभी पात्र शिक्षकों को नियमानुसार तुरंत लाभ पहुंचाया जाए।मामला साल 2016 की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा है।

इस परीक्षा के आधार पर पहले चरण के तहत साल 2019 में कई अभ्यर्थियों को जॉइनिंग मिल गई। लेकिन, कुछ अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रशासनिक या तकनीकी कारणों से बाद में हुई। जबकि विज्ञापन एक था, परीक्षा एक थी और मेरिट भी वही थी!याचिकाकर्ताओं का सीधा तर्क था कि जब देरी हमारी गलती से नहीं हुई, तो हमें सीनियरिटी और वेतन का नुकसान क्यों हो? हम 2019 में नियुक्त हुए अपने साथियों के बराबर ही लाभ के हकदार हैं।अदालत ने दोनों पक्षों को बहुत ध्यान से सुना। याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई पुराने फैसलों का हवाला दिया गया। कोर्ट ने भी माना कि सिर्फ जॉइनिंग की तारीख अलग होने से समान चयन प्रक्रिया वाले शिक्षकों के बीच भेदभाव नहीं किया जा सकता। प्रशासनिक लेटलतीफी का बिल कर्मचारियों से वसूलना न्यायसंगत नहीं है।कानूनी जानकारों के मुताबिक, यह फैसला भविष्य की नियुक्तियों के लिए भी 'समान अवसर और समान सेवा लाभ' के सिद्धांत को मजबूत करेगा। इस आदेश के बाद सैकड़ों शिक्षकों के आर्थिक और सेवा संबंधी अधिकार सुरक्षित हो गए हैं।