JHARKHAND NEWS : झारखंड के आदिवासी और ग्रामीण बच्चे अब सीखेंगे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की एबीसीडी
क्या AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिर्फ शहर के बच्चों के लिए है? क्या गांव और जंगल के करीब बसने वाले हमारे आदिवासी युवा तकनीक की इस दौड़ में पीछे छूट जाएंगे?बिलकुल नहीं! इस सोच को बदलने और ग्रामीण युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने के लिए पलामू टाइगर रिजर्व यानी पीटीआर ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब पलामू के जंगलों के बीच गूंजेगी तकनीक की गूंज, क्योंकि शुरू होने जा रहा है खास 'एआई बिल्डर बूटकैंप!बदली हुई इस तकनीक की दुनिया में ग्रामीण और आदिवासी युवाओं को जोड़ने के लिए पीटीआर और सहयोगी स्वयंसेवी संस्थाओं ने हाथ मिलाया है।पीटीआर के 'हुनर से रोजगार' कार्यक्रम के तहत अब तक 600 से अधिक युवाओं को पारंपरिक और रोजगारपरक प्रशिक्षण मिल चुका है। और अब इसी कड़ी में, युवाओं को सीधे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बारीकियों से जोड़ा जा रहा है।
पीटीआर के क्षेत्र निदेशक, एस.आर. नटेश का मानना है कि सही अवसर, सही प्रशिक्षण और सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो हमारे ग्रामीण बच्चे भी एआई का इस्तेमाल कर सकते हैं, नए विचार ला सकते हैं और खुद अपने समाधान विकसित कर सकते हैं।आज शिक्षा हो, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यटन या फिर रोजगार—हर जगह एआई का डंका बज रहा है। ऐसे में पलामू के युवाओं के लिए यह सिर्फ एक ट्रेनिंग नहीं, बल्कि ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर अपनी पहचान बनाने का सुनहरा मौका है!
इस सेशन में देश-विदेश के एआई विशेषज्ञ युवाओं को बताएंगे कि:
इस बूटकैंप में वे क्या-क्या सीखेंगे?
किस तरह के बेहतरीन प्रोजेक्ट्स और समाधान बना सकेंगे?
और साथ ही, प्रमाण-पत्र और शानदार पुरस्कार जीतने के क्या अवसर मिलेंगे?
इस कार्यक्रम में क्षेत्र के सभी महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं, प्राध्यापकों और संस्थान के प्रतिनिधियों को सादर आमंत्रित किया गया है।