सीएम हेमंत सोरेन के विजन का असर : झारखंड का आम सात समंदर पार पहुंचा,ग्रामीणों की मेहनत ने रचा इतिहास
रांची: फलों के राजा आम अब सिर्फ झारखंड या भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी मिठास घोल रहे हैं. झारखंड सरकार की दूरदर्शी सोच के कारण आजझारखंड के आमकी पहुंच सात समंदर पार तक पहुंच चुकी है. सरकार की पहल और ग्रामीण महिलाओं की मेहनत का फल है कि झारखंड के रसीले आम अब विदेश की पहली पसंद हो गयी है.
झारखण्ड का आमअंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी मिठास घोल रहा
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेनकी दूरदर्शी सोच और ग्रामीण महिलाओं की मेहनत के अनूठे संगम ने प्रमाणित कर दिया कि यदि कड़ी मेहनत और नेक सोच एक साथ मिल जाए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वैश्विक ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकता है. इसी सोच और कड़ी मेहनत से पलाश ब्रांड के तहत झारखण्ड मैंगो मार्केटिंग इनिशिएटिव ने ग्रामीण महिलाओं और किसानों की तकदीर बदल रही है. आज झारखण्ड का आम ना केवल देश के बड़े रिटेल चेन बल्कि सात समंदर पार अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी मिठास घोल रहा है.
बिरसा हरित ग्राम योजना की शुरुआत ने लाया रंग
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के निर्देश पर ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बिरसा हरित ग्राम योजना की शुरुआत कोरोना संक्रमण काल में हुई थी. सखी मंडल की दीदियों के साथ साथ संक्रमण काल में अपने गांव लौटे प्रवासी श्रमिकों ने भी योजना को अपने आजीविका का साधन बनाया था. इसका असर आज साफ दिख रहा है.
आम के बगीचेझारखंड के करीब 1.86 लाख एकड़ लहरा रहे
बता दें कि झारखंड के करीब 1.86 लाख एकड़ क्षेत्र में आम के बगीचे लहलहा रहे हैं, जिससे लगभग 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को सीधे तौर पर स्थायी आजीविका और रोजगार के अवसर मिले हैं. वर्तमान में लगभग 52,000 एकड़ के बागान पूरी तरह से तुड़ाई के लिए तैयार हैं, जिससे इस सीजन में करीब 50,000 मीट्रिक टन आम के उत्पादन का अनुमान है.
सखी मंडल की दीदियों ने संभाला कमान
इस पूरी मुहिम के केंद्र में झारखण्ड की ग्रामीण सखी मंडल की दीदियां और महिला किसान हैं. ग्रामीण महिलाओं की श्रम शक्ति का सम्मान के नारे के साथ ये दीदियां आम के कलेक्शन, ग्रेडिंग और पैकेजिंग से लेकर उनकी बिक्री और मार्केटिंग की कमान खुद संभाल रही हैं.
दुबई और लंदन तक पहुंचा झारखंड का आम
जेएसएलपीएसद्वारा किसानों को सक्रिय फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन्स (FPOs) से जोड़ा गया है,जिससे उन्हें संगठित बाजार और सही मूल्य मिल पा रहा है. मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में झारखण्ड के कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है. चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य ने निर्यात के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है. सिमडेगा ज़िले से जेबी एक्सपोर्टर्स के माध्यम से 1,580 किलोग्राम प्रीमियम आम सीधे लंदन (यूके) भेजे गए हैं. वहीं, रामगढ़ क्लस्टर से 1,500 मीट्रिक टन से अधिक आम दुबई (यूएई) निर्यात किए गए हैं. इस वैश्विक निर्यात पहल में सिमडेगा, रामगढ़ और पूर्वी सिंहभूम जैसे जिले अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं. आम की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों को बनाए रखने के लिए ICAR-RCER, पलांडू द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन और क्वालिटी प्रोटोकॉल प्रदान किया जा रहा है.
किसानों को अधिकतम लाभ देने पर सरकार का जोर
आमों की गुणवत्ता के आधार पर बाजार को तीन श्रेणियों Grade A, B, C में विभाजित कर सुव्यवस्थित किया गया है ताकि किसानों को अधिकतम लाभ मिल सके. ग्रेड-ए प्रीमियम क्वालिटी के इन आमों को APEDA प्रमाणित निर्यातकों के माध्यम से यूएई, सऊदी अरब और यूके जैसे देशों में निर्यात किया जा रहा है. साथ ही, घरेलू बाजार में इन्हें पलाश मार्ट और अपना मार्ट के आउटलेट्स पर 60 रुपये प्रति किलो की दर से सह-ब्रांडेड पैकेट में बेचा जा रहा है. गुमला के FPOs ने अकेले अपना मार्ट को 2,000 किलो आम की आपूर्ति की है. ग्रेड-बी के तहत संगठित खुदरा बाजारों और पलाश के रिटेल चैनलों में बाजार दरों पर भेजा जा रहा है. ग्रेड-सी के तहत आम जनता तक पहुंच बनाने के लिए इन्हें स्थानीय बाजारों, पलाश कैनोपी कियोस्क, बस स्टैंडों, जिला मुख्यालयों और साप्ताहिक हाट-बाजारों के माध्यम से बेचा जा रहा है. राज्य में सक्रिय लगभग 115 FPOs को पलाश मैंगो कैनोपी काउंटर्स से जोड़ा गया है, जो जिला-वार संग्रह और बिक्री का काम देख रहे हैं. इन काउंटर्स के माध्यम से अब तक झारखण्ड में लगभग 2,24,200 किलोग्राम आमों की बिक्री की जा चुकी है,जिससे 60.51 लाख से अधिक का कारोबार हुआ है.
आम बाजार के विस्तार के लिए कॉर्पोरेट के साथ भी चल रही बातचीत
बाजार को और मजबूत करने के लिए ब्लॉक और जिला स्तर पर फार्मर्स मेला और बायर-सेलर मीट आयोजित की जा रही हैं. इसके अलावा, बाजार विस्तार के लिए ब्लिंकिट, रिलायंस फ्रेश और कशिश मॉल जैसे कॉर्पोरेट के साथ भी बातचीत अंतिम चरण में है.