चुनाव पर राजनीति : सीएम हेमंत सोरेन के असम में दिए गए बयान पर सियासत तेज, क्या कहे पक्ष-विपक्ष के नेता जानिए खबर में
रांची:पूर्वोत्तर राज्य असम में इस बार विधानसभा चुनाव होना हैं. असम में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है. 126 सीट पर होने वाले विधानसभा चुनाव पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ट्राइबल सीट पर अपनी नजर बनाई हुई है.ट्राइबल वोट को अपनी ओर खींचने के लिए बीजेपी और जेएमएम अब आमने-सामने हो गए हैं. कुछ दिन पहले हिमंता के गढ़ में हेमंत सोरेन आदिवासी महासभा में बिगुल फूंकने गए थे. मंच से सीएम हेमंत ने बड़ा बयान दिया था. सीएम के बयान के बाद से राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. बताए कि आदिवासी महासभा में सीएम ने कहा था कि असम के लोग गुलामी की जिंदगी जीते हैं वहां के आदिवासी वहां के आदिवासियों की हालत पर चिंता जताते हुए कहा ऐसा लगता है जैसे हम अभी तक गुलामी के चंगुल से बाहर नहीं निकले हैं.
वहीं, इस मुद्दे पर राजनीति जंग छिड़ गई हैं. कांग्रेस मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार में जिस प्रकार वहां आदिवासियों के साथ जुल्म हो रहा हैं. इससे स्पष्ट हो रहा है कि नियत और नीति में क्या काम हो रहा हैं. भारतीय जनता पार्टी आदिवासियों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती हैं. उन्होंने कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी नैतिकता का पाठ पढ़ाती है तो तत्काल प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को असम के मुख्यमंत्री को बर्खास्त कर देना चाहिए.
जबकि, बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने कहा कि लगातार असम में जिस तरह से आदिवासियों के उत्थान के लिए वहां के मुख्यमंत्री काम कर रहे हैं. इस तरह से मुख्यमंत्री को बयान नहीं देना चाहिए. सीएम हेमंत सोरेन के बयान पर झारखंड की राजनीति गरमा गई है.