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BIHAR NEWS : सम्राट सरकार का सियासी संतुलन फॉर्मूला, चेतन आनंद को जिम्मेदारी, संजय सरावगी और उमेश कुशवाहा को बड़ा दर्जा

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पटना: बिहार की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा सियासी संदेश देने वाला फैसला सामने आया. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति का पुनर्गठन करते हुए जेडीयू विधायक चेतन आनंद को समिति का सदस्य बनाया है. चेतन आनंद बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन के बेटे हैं और पिछले कुछ समय से सरकार और पार्टी के भीतर उनकी नाराजगी की चर्चा लगातार हो रही थी. मंत्री पद नहीं मिलने के बाद वे कई मौकों पर खुलकर अपनी बात रखते नजर आए थे. ऐसे में सरकार का यह फैसला राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है.

सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया है. वहीं जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा को भी समिति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है. खास बात यह है कि संजय सरावगी और उमेश सिंह कुशवाहा दोनों को राज्य मंत्री का दर्जा प्रदान किया गया है. इससे साफ संकेत मिल रहा है कि सरकार संगठन और सत्ता के बीच बेहतर तालमेल बनाने की रणनीति पर काम कर रही है.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चेतन आनंद को समिति में शामिल कर सरकार ने जेडीयू के अंदर नाराज नेताओं को साधने की कोशिश की है. वहीं बीजेपी और जेडीयू दोनों दलों के प्रदेश अध्यक्षों को अहम जिम्मेदारी देकर एनडीए के भीतर राजनीतिक संतुलन साधने का प्रयास भी दिखाई दे रहा है.

सरकार के इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. आने वाले दिनों में इसका असर संगठनात्मक समीकरणों और राजनीतिक रणनीतियों पर भी देखने को मिल सकता है.

क्या हैं इस फैसले के मायने?

सम्राट सरकार का यह फैसला केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि पूरी तरह राजनीतिक माना जा रहा है. चेतन आनंद को जिम्मेदारी देकर सरकार ने नाराजगी कम करने और युवा नेताओं को साधने का संकेत दिया है. वहीं बीजेपी और जेडीयू दोनों प्रदेश अध्यक्षों को अहम भूमिका देकर एनडीए के भीतर संतुलन मजबूत करने की कोशिश की गई है. राज्य मंत्री का दर्जा देकर संगठन के नेताओं की राजनीतिक ताकत भी बढ़ाई गई है. माना जा रहा है कि आने वाले चुनावों को देखते हुए सरकार सामाजिक और राजनीतिक समीकरण मजबूत करने में जुट गई है.

पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-