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BIHAR NEWS : पटना HC में ट्रैफिक चालान काटने के विवादों को लोक अदालत में नहीं ले जाने के मामले पर हुई सुनवाई

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Patna : पटना हाईकोर्ट में राज्य में ट्रैफिक चालान काटे जाने से सम्बन्धित विवादों को लोक अदालत में नहीं ले जाने के मामले पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस मीनाक्षी मदन राय की खंडपीठ ने रानी तिवारी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया इन ट्रैफिक चालान विवाद से संबंधित मामलों की सुनवाई हर जिला कोर्ट में स्थायी लोक अदालत द्वारा सुनवाई व निपटारा किया जायेगा.

बालसा का ये कहना था कि लीगल सर्विस अथॉरिटी एक्ट के स्थायी लोक अदालत में निपटारे के लिए विशेषरूप से नहीं लिखा है.

अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने बताया कि सेक्शन22सी में विशेष तौर पर लिखा है कि सिर्फ दो तरह के मामले पर लोक अदालत में नहीं लिया जा सकता. पहले जहां अपराध नान compoundable हो और दूसरा जहाँ जुर्माना दस लाख रुपये से ज्यादा हो. लेकिन ट्रैफिक चालान इन दोनों श्रेणियों में नहीं आते हैं.

पूर्व में सुनवाई के दौरान तत्कालीन महाधिवक्ता पी के शाही, बिहार ने बताया था कि बिहार सरकार ने ट्रैफिक चालान के नियमों के परिवर्तन की अधिसूचना30अप्रैल, 2026को जारी कर दी है. कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार आगे भी इस तरह की अधिसूचना जारी करने पर विचार करेगी.

पहले की सुनवाईयों में कोर्ट ने जानना चाहा था कि दूसरे राज्यों की तरह बिहार में चालान विवादों के निपटारे के लिए लोक अदालत का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है.

कोर्ट ने निर्देश दिया था कि जितने जिला स्तर के न्यायिक पदाधिकारी हैं, उन्हें इस ट्रैफिक चालान विवाद को प्राथमिकता देते हुए निबटारा करे. ऐसी व्यवस्था हो, जिससे लोग ऑनलाइन राशि जमा कर सके.

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि विभिन्न जिला न्यायालयों में267509ट्रैफिक चालान विवादों से संबंधित मामले की सुनवाई के लिए लंबित हैं.1अप्रैल, 2026से लेकर16अप्रैल, 2026तक10850और मामले आ गए.

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने कोर्ट को बताया था कि विभिन्न राज्यों में ट्रैफिक चालान काटे जाने से सम्बन्धित विवादों को लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों द्वारा सुनवाई कर सेटलमेंट किया जाता है.

कोर्ट ने इस पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ट्रैफिक चालान सम्बन्धी विवादों को लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों में सुनवाई व निपटारा किया जाता है. कोर्ट ने उड़ीसा का भी उदाहरण देते हुए कहा था कि वहां ट्रैफिक चालान सम्बन्धी विवादों को लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों को सुलझाया जाता है.

कोर्ट ने कहा कि सामान्य कोर्ट पर बोझ कम करने के लिए लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों का गठन किया गया है. कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे मामलों को पटना हाईकोर्ट ने राज्य में ट्रैफिक चालान काटे जाने से सम्बन्धित विवादों को लोक अदालतों में नहीं ले जाने पर सख्त रुख अपनाया था.

कोर्ट ने कहा कि सामान्य कोर्ट पर बोझ कम करने के लिए लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों का गठन किया गया है. कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे मामलों को लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों में ले जाया जाये और उनका वहां समाधान हो जाये,तय सामान्य अदालतों पर बोझ भी कम होगा और समय भी बचेगा.

अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने बताया था कि बिहार में मनमानी ढंग से चालान काटे जाते हैं. लेकिन इन विवादों के निपटारे के लिए कोई प्रभावी तंत्र नहीं है. इससे लोगों को परिवहन विभाग के मनमानी का शिकार होना पड़ता है.

उन्होंने कोर्ट को बताया था कि ये मामले विभाग की निष्क्रियता के कारण बिहार में लोक अदालत में नहीं पहुँच पाते हैं जिससे बिहार में लोक अदालतों द्वारा केसों की निष्पादन की संख्या कम होती.

उन्होंने कोर्ट को बताया था कि अगर ट्रैफिक चालान लंबित होता है, तो उन्हें जबरदस्त्ती ट्रैफिक चालान कटवाया जाता है. जब तक ट्रैफिक चालान नहीं काटे जाते,तब तक उन्हें प्रदूषण बोर्ड सर्टिफिकेट नहीं देता. ये मनमानी लगातार जारी है.

कोर्ट ने उपरोक्त आदेश के साथ रानी तिवारी द्वारा दायर जनहित याचिका को निष्पादित कर दिया.

पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट--