BIHAR NEWS : बोधगया में मठों के व्यावसायिक उपयोग मामले पर पटना HC ने सरकार को 10 दिनों में प्रगति रिपोर्ट देने का दिया आदेश
Patna : पटना हाईकोर्ट ने बोधगया में विभिन्न देशों की ओर से बनाए गए मठों और धर्मशालाओं का व्यावसायिक उपयोग किये जाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई की. कोर्ट ने राज्य सरकार को दस दिनों के भीतर प्रगति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया.
एक्टिंग चीफ जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ ने बोधगया होटल एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की.
कोर्ट को बताया गया कि विभिन्न देशों द्वारा बोधगया में जो मठों और धर्मशालाओं का निर्माण हुआ है,उसका व्यावसायिक उपयोग कर रहे हैं. जिसका खमियाजा बोधगया के होटल व्यवसायी को उठाना पड़ रहा है.
उनका कहना था कि जहां पहले उनके होटल में पर्यटक ठहरते थे, अब विदेशी पर्यटक अपने देश के मठ धर्मशालाओं में ठहरने लगे हैं. उनका कहना था कि मठों के नाम पर चल रहे आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाया जाना चाहिए.
वहीं सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि राज्य सरकार ने बोधगया में पर्यटन अवसंरचना के विकास और पूंजी निवेश पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं. लेकिन इसका लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था को नहीं मिल पा रहा है.
बौद्ध धर्मावलंबी देशों की कई संस्थाओं ने मठ के नाम पर बड़े-बड़े भवन बना लिए हैं और उनमें विदेशी पर्यटकों को ठहराकर पैसा वसूल रहे हैं, जिससे स्थानीय होटल व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.
उनका कहना था कि मुख्य सचिव के अध्यक्षता में गठित कमेटी ने पाया कि इन मठों ने स्थानीय कानूनों का उल्लंघन कर रहे हैं. बिना नक्शा पास कराए निर्माण कर लिए हैं.
यहीं नहीं, विदेशों से आने वाले पर्यटकों की सूचना स्थानीय पुलिस को भी नहीं देते हैं. कमेटी ने सभी सम्बंधित विभागों को निर्देश दिया कि पूरे मामले की समीक्षा कर विधि सम्मत और ठोस कार्य योजना बना कर कार्रवाई करें.
इस बैठक में गया डीएम ने जानकारी दी थी कि बोधगया क्षेत्र में कुल55मठ हैं, जिनमें से15मठों को सरकार की ओर से जमीन दी गई है. जांच में पाया गया कि कई मठों में पर्यटकों के ठहरने के लिए बड़ी संख्या में कमरे बने हैं और उनसे शुल्क लिया जा रहा है.
कुछ मठों के परिसर में प्रसाधन सामग्री और खाने-पीने की दुकानें भी संचालित हो रही है. डीएम ने बताया कि जांच के दौरान मठ प्रबंधन सहयोग नहीं किये और दस्तावेज मांगने पर नई दिल्ली स्थित संबंधित दूतावास से संपर्क करने की बात कही.
जबकि नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव ने सुझाव दिये कि सभी मठों के निर्माण की जांच की जाए कि वे विधिसम्मत बायलॉज के अनुसार हैं या नहीं. वहीं वाणिज्य कर विभाग ने मठों के व्यावसायिक उपयोग पर वाणिज्य-कर और सेवा-कर लगाने का सुझाव दिया.
इस बैठक में लिए गये निर्णय के अनुसार क्या कार्रवाई की गई इस बारे में पूरी जानकारी देना का आदेश कोर्ट ने दिया.
पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-