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BIHAR NEWS : मिथिलांचल से सारण तक पहुंची मखाने की खुशहाली, किसानों के लिए खुले नए अवसर

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पटना/सारण : मिथिलांचल और सीमांचल की पहचान बन चुकी मखाना की खेती अब बिहार के नए इलाकों में भी अपनी जड़ें मजबूत कर रही है. सुपौल, मधुबनी, सीतामढ़ी, किशनगंज और अररिया के बाद अब सारण जिले के खेतों में भी 'सफेद सोना' लहलहाने की तैयारी है. गेहूं और धान की परंपरागत खेती के लिए प्रसिद्ध सारण में जलालपुर प्रखंड के प्रगतिशील किसान अजीत भारती ने मखाना की खेती की शुरुआत कर जिले में कृषि की नई संभावनाओं का द्वार खोल दिया है.

इस विषय पर जानकारी देते हुए जिले के कृषि पदाधिकारी मधुरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि बिहार सरकार की मदद से मखाना को मिली वैश्विक पहचान के बाद अब छपरा के किसानों ने भी इसकी खेती करने का निर्णय लिया है. आमतौर पर इस क्षेत्र में परंपरागत गेहूं या चावल के फसल उगाये जाते हैं. लेकिन अब छपरा जिले में भी मखाना की खेती शुरु हो गई है. इसके लिए विभाग द्वारा किसानों को प्रशिक्षण देने की योजना बनायी जा रही है. अब जिले में मखाना के फसल से किसानों की आय भी दोगुनी होगी. वहीं मखाना के अलावा पान की खेती, मौसमी, गेंदा फूल व मशरुम की खेती को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है.

क्या कहते हैं मखाना किसान

मांझी प्रखंड के रहने वाले मखाना किसान अजीत भारती ने कहा कि वे कई वर्षों से कटिहार में मखाना की खेती कर रहे हैं. कृषि विभाग के मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग से हर वर्ष मखाना की बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण पैदावार हो रही है. अब उन्होंने अपने पैतृक घर सारण में 25 एकड़ की जमीन पर मखाना की खेती करने का निर्णय लिया है. शुरुआती चरण में मखाना की फसल काफी स्वस्थ एवं अच्छी स्थिति में दिखाई दे रही है. प्रखंड व जिला अधिकारियों ने मदद के तौर पर फसल को अनुदान के लिए आवेदन जमा करवाया है. बिहार के युवा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य के किसानों को समृद्धि के साथ प्रोत्साहन भी प्राप्त हो रहा है.

वैश्विक बाजार में मखाना बना खास

बता दें कि प्रदेश का गौरव मखाना अब वैश्विक बाजार में अपनी अलग पहचान बना चुका है. बिहार का मखाना अब केवल देश ही नहीं, बल्कि यूरोप समेत कई देशों के उपभोक्ताओं की भी पहली पसंद बनता जा रहा है. इसके अनूठे स्वाद और उच्च पोषण मूल्य ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी अलग पहचान बनाई है. उत्तरी बिहार के दरभंगा क्षेत्र से 7 मीट्रिक टन मखाना का कनाडा में निर्यात किया जा रहा है. मखाना की खेती की यह सफलता किसानों की मेहनत, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और बिहार की बढ़ती कृषि क्षमता का प्रमाण है. बिहार सरकार 'लोकल से ग्लोबल' के संकल्प के साथ किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने हेतु निरंतर प्रतिबद्ध है.