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BIHAR NEWS : पटना HC में बिहार में ट्रैफिक चालान काटे जाने के विवादों को लोक अदालत में नहीं ले जाने के मामले में हुई सुनवाई

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Patna : पटना हाईकोर्ट में राज्य में ट्रैफिक चालान काटे जाने से सम्बन्धित विवादों को लोक अदालत में नहीं ले जाने के मामले पर सुनवाई हुई है. चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने रानी तिवारी की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता,बिहार ने बताया कि बिहार सरकार ने एकमुश्त यातायात चालान निपटान योजना,2026 की अधिसूचना 30 अप्रैल,2026 को जारी कर दी है. इस मामले पर अगली सुनवाई गर्मी की छुट्टियों के बाद होगी.

पिछले सुनवाई में कोर्ट ने जानना चाहा था कि दूसरे राज्यों की तरह बिहार में चालान विवादों के निपटारे के लिए लोक अदालत का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है.

गौरतलब है कि 9 मई,2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि जितने भी जिला न्यायालय है,वहां बड़े पैमाने पर ट्रैफिक चालान से संबंधित विवादों का लोक अदालत के माध्यम से निबटारा किया जाए. जो राज्य सरकार वनtime settlementके तहत कार्रवाई की जाए.

कोर्ट ने निर्देश दिया कि जितने जिला स्तर के न्यायिक पदाधिकारी है,उन्हें इस ट्राफिक चालान विवाद को प्राथमिकता देते हुए निबटारा करे. ऐसी व्यवस्था हो,जिससे लोगonlineराशि जमा कर सके.

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि विभिन्न जिला न्यायालयों में 267509 ट्राफिक चालान विवादों से संबंधित मामले सुनवाई के लिए लंबित है. 1 अप्रैल,2026 से लेकर 16 अप्रैल,2026 तक 10850 और मामले आ गए.

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने कोर्ट को बताया था कि विभिन्न राज्यों में ट्रैफिक चालान काटे जाने से सम्बन्धित विवादों को लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों द्वारा सुनवाई कर सेटलमेंट किया जाता है.

कोर्ट ने इस पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ट्रैफिक चालान सम्बन्धी विवादों को लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों में सुनवाई व निपटारा किया जाता है. कोर्ट ने उड़ीसा का भी उदाहरण देते हुए कहा था कि वहां ट्रैफिक चालान सम्बन्धी विवादों को लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों में सुलझाया जाता है.

कोर्ट ने कहा कि सामान्य कोर्ट पर बोझ कम करने के लिए लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों का गठन किया गया है. कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे मामलों को पटना हाईकोर्ट ने राज्य में ट्रैफिक चालान काटे जाने से सम्बन्धित विवादों को लोक अदालत में नहीं ले जाने पर सख्त रुख अपनाया था.

कोर्ट ने इस पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ट्रैफिक चालान सम्बन्धी विवादों को लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों में सुनवाई व निपटारा किया जाता है. कोर्ट ने उड़ीसा का भी उदाहरण देते हुए कहा कि वहां ट्रैफिक चालान सम्बन्धी विवादों को लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों सुलझाया जाता है.

कोर्ट ने कहा कि सामान्य कोर्ट पर बोझ कम करने के लिए लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों का गठन किया गया है।कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे मामलों को लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों में ले जाया जाये और उनका वहां समाधान हो जाये,तय सामान्य अदालतों पर बोझ भी कम होगा और समय भी बचेगा.

अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने कोर्ट को बताया था कि चंडीगढ़ में लगातार दो सप्ताह लोक अदालत चला कर बड़ी संख्या में ट्रैफिक चालान से सम्बन्धित विवादों का समाधान किया गया. उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र,गुजरात,दिल्ली जैसे राज्यों में इस प्रकार के विवादों को लोक अदालतों के माध्यम से सुलझाया जाता है.

लेकिन बिहार में मनमानीविभागों ढंग से चालान काटे जाते हैं. लेकिन इन विवादों के निपटारे के लिए कोई प्रभावी तंत्र नहीं है. इससे लोगों को परिवहन विभाग के मनमानी का शिकार होना पड़ता है.

उन्होंने कोर्ट को बताया था कि ये मामले विभाग की निष्क्रियता के कारण बिहार में लोक अदालत में नहीं पहुँच पाते हैं जिससे बिहार में लोक अदालतों द्वारा केसों की निष्पादन की संख्या कम होती है.

जबकि गुजरात,महाराष्ट्र व उड़ीसा जैसे राज्यों में विभाग की सक्रियता के कारण ऐसे मामलें लोक अदालतों में बड़ी तादाद में जाते हैं. इससे लोक अदालतों द्वारा ऐसे मामलों की संख्या बहुत दिखती है.

अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने कहा था कि यदि बिहार में भी ट्रैफिक चालान काटे जाने से जुड़े विवादों को लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों के माध्यम से सुलझाया जाये,तो राज्य के लोगों को काफी राहत मिलेगी. इस फोरम में जाकर वे जल्दी न्याय पा सकेंगे.

उन्होंने कोर्ट को बताया था कि अगर ट्रैफिक चालान लंबित होता है,तो उन्हें जबरदस्त्ती ट्रैफिक चालान कटवाया जाता है. जब तक ट्रैफिक चालान नहीं काटे जाते,तब तक उन्हें प्रदूषण बोर्ड सर्टिफिकेट नहीं देता. ये मनमानी लगातार जारी है.

इस मामले पर कल भी सुनवाई जारी रहेगी. गौरतलब है कि 14 मार्च,2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन होना है. इस सन्दर्भ में कोर्ट को दिशानिर्देश दे सकता है. लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों में ले जाया जाये और उनका वहां समाधान हो जाये,तय सामान्य अदालतों पर बोझ भी कम होगा और समय भी बचेगा.

अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने कोर्ट को बताया कि चंडीगढ़ में लगातार दो सप्ताह लोक अदालत चला कर बड़ी संख्या में ट्रैफिक चालान से सम्बन्धित विवादों का समाधान किया गया. उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र,गुजरात,दिल्ली जैसे राज्यों में इस प्रकार के विवादों को लोक अदालतों के माध्यम से सुलझाया जाता है.

लेकिन बिहार में मनमानी विभागों को ढंग से चालान काटे जाते हैं. लेकिन इन विवादों के निपटारे के लिए कोई प्रभावी तंत्र नहीं है. इससे लोगों को परिवहन विभाग के मनमानी का शिकार होना पड़ता है.

उन्होंने कोर्ट को बताया कि ये मामले विभाग की निष्क्रियता के कारण बिहार में लोक अदालत में नहीं पहुँच पाते हैं जिससे बिहार में लोक अदालतों द्वारा केसों की निष्पादन की संख्या कम होती है.

जबकि गुजरात,महाराष्ट्र व उड़ीसा जैसे राज्यों में विभाग की सक्रियता के कारण ऐसे मामले लोक अदालतों में बड़ी तादाद में जाते हैं. इससे लोक अदालतों द्वारा ऐसे मामलों की संख्या बहुत दिखती है.

अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने कहा कि यदि बिहार में भी ट्रैफिक चालान काटे जाने से जुड़े विवादों को लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों के माध्यम से सुलझाया जाये,तो राज्य के लोगों को काफी राहत मिलेगी. इस फोरम में जाकर वे जल्दी न्याय पा सकेंगे.

उन्होंने कोर्ट को बताया था कि अगर ट्रैफिक चालान लंबित होता है,तो उन्हें जबरदस्त्ती ट्रैफिक चालान कटवाया जाता है. जब तक ट्रैफिक चालान नहीं काटे जाते,तब तक उन्हें प्रदूषण बोर्ड सर्टिफिकेट नहीं देता.ये मनमानी लगातार जारी है.

इस स्कीम के अंतर्गत मोटर वाहन बेल्ट में जुर्माने की राशि 500 रुपये की गई है. इस मामले पर अगली सुनवाई गर्मी की छुट्टियों के बाद होगी.

पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट--