BIHAR NEWS : पटना HC ने जमीन विवाद मामले में एक क्वैशिंग याचिका की खारिज
पटना: जमीन के सौदे में बकाया रकम का भुगतान नहीं करना अपने आप में धोखाधड़ी (चीटिंग) का अपराध नहीं है. इसके लिए यह साबित करना जरूरी है कि समझौते के समय से ही आरोपी की नीयत धोखा देने की थी. पटना हाइकोर्ट ने सीवान के एक जमीन विवाद में यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए योगेश कुमार सिंह की क्वैशिंग याचिका खारिज कर दी. न्यायाधीश अलोक कुमार पांडेय ने कहा कि महज अनुबंध का उल्लंघन आपराधिक मामला नहीं बन जाता.
मामला15जनवरी2021के जमीन खरीद समझौते से जुड़ा है. शिकायतकर्ता योगेश कुमार सिंह के अनुसार पांच कट्ठा जमीन की कीमत2.26करोड़ रुपये तय हुई थी और20लाख रुपये अग्रिम दिये गये थे. बाद में छह कट्ठा छह धुर जमीन की रजिस्ट्री लालिता देवी के नाम कर दी गयी. इसके एवज में1.60करोड़ रुपये का भुगतान हुआ.46लाख और अतिरिक्त जमीन की कीमत44.20लाख रुपये समेत कुल90.20लाख रुपये बकाया रह गये.
बकाया राशि नहीं मिलने पर योगेश ने लालिता देवी और शिवजी प्रसाद के खिलाफ धोखाधड़ी,विश्वासघात और आपराधिक षड्यंत्र का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करायी. हालांकि,सीवान के न्यायिक दंडाधिकारी ने24जनवरी2024को शिकायत खारिज कर दी. पुनरीक्षण अदालत ने भी इसे दीवानी विवाद मानते हुए राहत नहीं दी.
हाइकोर्ट ने कहा कि मामले में1.80करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका था. रिकॉर्ड पर शुरुआत से धोखा देने की नीयत का कोई ठोस तथ्य नहीं है. केवल बाद में वादा पूरा नहीं करने से धारा420के तहत अपराध नहीं बनता. कोर्ट ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता यह नहीं बता सका कि आरोपितों को कोई संपत्ति सौंपी गयी थी,जिसका उन्होंने बेईमानी से दुरुपयोग किया हो.
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि हर अनुबंध का उल्लंघन चीटिंग नहीं होता. मामले का मूल स्वरूप बकाया राशि की वसूली से जुड़ा है. इसलिए आपराधिक कार्यवाही का आधार नहीं बनता. याचिका खारिज कर दी गयी.
पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट--