BIHAR NEWS : सेवानिवृत्त कर्मी जीवनकाल में दिव्यांग बच्चे का नाम पेंशन भुगतान आदेश में करा सकते शामिल - HC
Patna : पटना हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला देते हुए स्पष्ट किया कि पेंशनर पिता के जीवनकाल में भी दिव्यांग बच्चे का नाम पेंशन भुगतान आदेश में जुड़ेगा.
कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और मानवीय फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि सेवानिवृत्त कर्मचारी अपने जीवनकाल में ही अपने दिव्यांग आश्रित बच्चे का नाम पेंशन भुगतान आदेश में शामिल करा सकते हैं. कोर्ट ने साफ किया कि नाम जोड़ना एक प्रशासनिक व्यवस्था है, न कि समय से पहले पेंशन राशि का भुगतान.
ये मामला सोनपुर (सारण) निवासी सेवानिवृत्त चपरासी रामानंद राय ने अपने50%लोकोमोटर दिव्यांगता से पीड़ित बेटे दीपक कुमार पुष्पेन्द्र का नामPPO में दर्ज कराने के लिए याचिका दायर की थी.
वित्त विभाग और महालेखाकार कार्यालय का तर्क था कि नियमानुसार माता-पिता की मृत्यु के बाद ही दिव्यांग संतान का दावा मान्य होता है. जस्टिस पूर्णेन्दु सिंह की एकल पीठ ने इस प्रक्रियात्मक देरी और इनकार को असंवैधानिक तथा'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' की आत्मा के खिलाफ माना.
कोर्ट ने टिप्पणी की कि अभिभावक की सेवानिवृत्ति के बाद ही बढ़ती महंगाई और इलाज के खर्चों के कारण राज्य के सहयोग की आवश्यकता होती है. पिता की मृत्यु के बाद दिव्यांग बच्चे को कागजी प्रक्रियाओं के भरोसे छोड़ देना उसके अधिकारों का हनन है.
कोर्ट ने बिहार के मुख्य सचिव को सलाह दी कि यदि आवश्यक हो,तो बिहार पेंशन नियमावली में संशोधन कर दिव्यांगजनों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
इसके साथ ही याचिका को त्वरित निष्पादन के निर्देशों के साथ निपटा दिया गया. इस फैसले से राज्य के हजारों दिव्यांग आश्रितों को बड़ी राहत मिलेगी.
पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट--