BIHAR NEWS : शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आवश्यक, परंतु विद्यालयों के वैधानिक एवं वित्तीय अधिकारों की भी रक्षा हो — सैयद शमायल अहमद
पटना: प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद शमायल अहमद ने बिहार सरकार द्वारा निजी विद्यालयों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने की पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि शिक्षा व्यवस्था में संतुलन, वैधानिक प्रक्रिया एवं संस्थागत अधिकारों का संरक्षण समान रूप से आवश्यक है.
उन्होंने कहा किBihar Private Schools (Fee Regulation) Act, 2019के अंतर्गत निजी विद्यालयों को शुल्क निर्धारण एवं शुल्क संग्रहण का वैधानिक अधिकार प्राप्त है तथा अधिनियम की धारा4के अनुसार विद्यालयों को अपनी शुल्क संरचना सार्वजनिक करने एवं नियमानुसार संचालित करने का दायित्व दिया गया है.
राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद शमायल अहमद ने कहा कि संगठन पारदर्शिता, मनमानी शुल्क वृद्धि पर नियंत्रण तथा अभिभावकों के हितों की सुरक्षा का पूर्ण समर्थन करता है, किंतु“शुल्क भुगतान किए बिना परीक्षा में सम्मिलित होने एवं परिणाम जारी करने” जैसे प्रावधानों पर विधिक एवं प्रशासनिक स्तर पर पुनर्विचार आवश्यक है.
उन्होंने कहा कि बिहार प्राइवेट स्कूल्स (फीस रेगुलेशन) एक्ट, 2019निजी विद्यालयों को वैध शुल्क संग्रहण का अधिकार देता है और विद्यालयों की संपूर्ण शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था इसी शुल्क पर आधारित होती है. शिक्षकों एवं कर्मचारियों के वेतन, भवन रखरखाव, बिजली, परिवहन, प्रयोगशाला, डिजिटल शिक्षा तथा अन्य सुविधाओं का संचालन नियमित शुल्क भुगतान से ही संभव हो पाता है.
सैयद शमायल अहमद ने स्पष्ट किया कि संगठन किसी भी छात्र की शिक्षा बाधित करने के पक्ष में नहीं है तथा आर्थिक रूप से कमजोर एवं वास्तविक जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए सरकार को सहायता योजना, छात्रवृत्ति अथवा विशेष राहत तंत्र विकसित करना चाहिए. परंतु सभी मामलों में बिना शुल्क भुगतान के परीक्षा एवं परिणाम जारी करने को बाध्यकारी बनाना निजी विद्यालयों के वैधानिक अधिकारों एवं वित्तीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है.
उन्होंने कहा कि किसी भी नीति का निर्माण संविधान सम्मत, व्यावहारिक एवं संतुलित होना चाहिए, जिससे छात्रों के शिक्षा अधिकार के साथ-साथ संस्थानों के प्रशासनिक एवं आर्थिक अधिकार भी सुरक्षित रहे.
प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन ने बिहार सरकार से आग्रह किया है कि इस विषय पर निजी विद्यालय संगठनों, शिक्षाविदों, अभिभावक प्रतिनिधियों एवं विधि विशेषज्ञों के साथ विस्तृत संवाद कर व्यवहारिक एवं न्यायसंगत नीति तैयार की जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण एवं टिकाऊ बनी रहे.