BIHAR NEWS : पटना हाईकोर्ट ने सरकार को आर्द्रभूमि और अभ्यारण्यों के पास अतिक्रमणों को मुक्त कराने का दिया आदेश

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Patna : पटना हाईकोर्ट राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में आर्द्रभूमि और अभ्यारण्यों के आसपास हुए अतिक्रमणों को लेकर काफी गंभीरता से लिया है. चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने वेटेरन फोरम फॉर ट्रांसपेरंसी इन पब्लिक लाइफ की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को इन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का निर्देश दिया. इसके लिए कोर्ट ने राज्य सरकार को तीन माह की मोहलत दिया है.

चूँकि राज्य सरकार ने इन अवैध अतिक्रमणों को हटाने का निर्णय किया है,इसलिए कोर्ट ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई में कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. इसमें अतिक्रमण हटाने,चहारदीवारी निर्माण व बंदोबस्ती के सम्बन्ध में की गयी कार्रवाईयों का ब्यौरा तलब किया है.

साथ ही इन जगहों पर अवैध निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है. अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि बेगूसराय और जमुई जिले में तीन आद्रभूमि है.

इनमें बेगूसराय में कबरताल आर्द्रभूमि है. जबकि नेगी और नकटी बर्ड सैंक्चुअरी जमुई जिले में है. उन्होंने बताया कि 28 जून,1989 में बिहार सरकार ने एक अधिसूचना जारी करते बताया कि कँवर झील पक्षी अभ्यारण्य,जो जयमंगलगढ़,बेगूसराय जिले में है,का क्षेत्रफल 420.28 एकड़ है.

जयमंगलगढ़ क्षेत्र में 335 अविभाजित परिवार अतिक्रमण करके रह रहे है. कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि इन परिवारों के अस्थायी रहने की व्यवस्था करें,लेकिन इन क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त कराये.

उन्होंने बताया कि इसमें 15780 एकड़ भूमि में से मात्र 1564 एकड़ भूमि का बंदोबस्ती हुआ है. शेष लगभग चौदह हजार एकड़ भूमि का सरकार ने बंदोबस्ती नहीं की है. बाकी भूमि बेगूसराय जिला प्रशासन के अंतर्गत है.

उन्होंने कोर्ट को बताया कि 2017 के प्रावधानों के अनुसार बिना अनुमति के किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं होगा. लेकिन सरकार भूमि का घेराबंदी ही अब तक नहीं किया है.

पटना हाईकोर्ट ने 11 जुलाई,2025 को जयमंगलगढ़,बेगूसराय में अवैध स्कूल,मंदिर,गेट,धर्मशाला,किसान भवन,पंचायत भवन,कम्युनिटी हॉल आदि के अवैध निर्माण पर जवाब तलब किया था. साथ ही इस वेटलैंड में इन निर्माणों में जिला प्रशासन की मिलीभगत का भी आरोप था.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार और मुख्य वन संरक्षक सह सदस्य, बिहार स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी को अगली सुनवाई में स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब देने का निर्देश दिया था . साथ ही इन अवैध निर्माणों पर रोक लगा दिया था. इस मामले पर अगली सुनवाई 15 अप्रैल,2026 को होगी.