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बिहार में पेपर लीक का बड़ा खुलासा : 9 सालों में 6 बड़ी परीक्षाओं में धांधली,500 से ज्यादा गिरफ्तार फिर भी आरोपियों और जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई नहीं

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पटना: बिहार में पिछले नौ वर्षों के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के छह बड़े मामले सामने आए। इन मामलों में 50 लाख से अधिक अभ्यर्थी प्रभावित हुए। 500 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया, जेल भेजा गया, चार्जशीट दाखिल हुई और कई आरोपी बाद में जमानत पर बाहर आ गए। इसके बावजूद किसी बड़े जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई नहीं होने से परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

67वीं BPSC परीक्षा: मई 2022 में परीक्षा शुरू होने से पहले पेपर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। परीक्षा रद्द करनी पड़ी। जांच में कई गिरफ्तारियां हुईं। आर्थिक अपराध इकाई ने तत्कालीन अधिकारियों से पूछताछ की, लेकिन जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई नहीं हुई।

सिपाही भर्ती 2023: परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के मामले में बिहार के कई जिलों में केस दर्ज हुए। जांच के दौरान 125 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। कई आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल की गई, लेकिन अब तक कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई।

BPSC TRE-3: मार्च 2024 में शिक्षक भर्ती परीक्षा से एक दिन पहले पेपर लीक का मामला सामने आया। पटना और हजारीबाग में छापेमारी की गई। 100 से अधिक अभ्यर्थियों और परीक्षा माफिया को पकड़ा गया। मामले में अब तक 296 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

NEET 2024: पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई तक पहुंची। देशभर में परीक्षा प्रभावित हुई और बिहार में भी कार्रवाई हुई।

अन्य परीक्षाएं: एईई परीक्षा और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी यानी सीएचओ परीक्षा में भी गड़बड़ी के मामले सामने आए। सीएचओ परीक्षा में 40 लोगों की गिरफ्तारी हुई।

लगातार पेपर लीक की घटनाओं के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होने से परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।