BIG BREAKING : चाईबासा में 10 लाख के इनामी नक्सली सालुका कायम ने डाला हथियार, 2 महिला माओवादियों के साथ किया सरेंडर
चाईबासा : इस वक्त की बड़ी खबर झारखंड के चाईबासा से है जहां पश्चिमी सिंहभूम में माओवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे लगातार अभियान के बीच राज्य पुलिस को एक बार फिर बड़ी कामयाबी मिली है.
प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के जोनल कमेटी सदस्य और लंबे समय से सक्रिय कुख्यात नक्सली सालुका कायम उर्फ भुवनेश्वर उर्फ मरु उर्फ डांगिल उर्फ विक्रम उर्फ तुबई उर्फ जयराम ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है. सालुका के साथ दो महिला नक्सलियों पिंकी और एक इनामी कोदोमुनी ने भी सरेंडर किया है. पुलिस मुख्यालय ने तीनों के सरेंडर करने की पुष्टि की है.
सरेंडर करने वाले10लाख रुपये के इनामी माओवादी जोनल कमांडर सालुका कायम उर्फ भुवनेश्वर कायम को भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेताओं का भरोसेमंद कैडर माना जाता था. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार,वह संगठन के वरिष्ठ माओवादी नेता मिसिर बेसरा का बेहद करीबी सहयोगी रहा है और लंबे समय तक उसके निर्देश पर कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में संगठन की गतिविधियों का संचालन करता रहा है.
सालुका केवल हथियारबंद दस्तों का नेतृत्व ही नहीं करता था,बल्कि नए कैडरों की भर्ती,लेवी वसूली,सुरक्षित ठिकानों की व्यवस्था और संगठन के संदेशों को विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचाने जैसी जिम्मेदारियां भी संभालता था. संगठन के भीतर उसे एक भरोसेमंद और सक्रिय कमांडर के रूप में देखा जाता था.
सारंडा और कोल्हान के जंगलों में पुलिस, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे अभियान ने माओवादी संगठन की गतिविधियों को काफी हद तक सीमित कर दिया है. लगातार घेराबंदी, सुरक्षित ठिकानों की कमी और संगठन के कमजोर पड़ते नेटवर्क के कारण कई सक्रिय माओवादी अब मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुन रहे हैं. इसी कड़ी में सालुका कायम ने भी आत्मसमर्पण का फैसला लिया और दो महिला साथियो के साथ हथियार डाल दिए. पुलिस के अनुसार मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद से ही सालुका बेहद तनाव में था.
राजीव कुमार की रिपोर्ट-