बेरमो में सड़क किनारे धंसी जमीन : सैकड़ों परिवार में दहशत,नीचे सुलगता खतरा ऊपर रोजमर्रा की जिंदगी
बेरमो: बेरमो स्थित पांच नंबर धौड़ा के पास गुरूवार को तेज आवाज के साथ सड़क किनारे की जमींदोज हो गया.आवाज सुनकर लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए. बच्चों को गोद में उठाकर महिलाएं सड़क पर दौड़ पड़ीं. बुजुर्गों की आंखों में डर साफ दिखाई दे रहा था. हर किसी के मन में एक ही सवाल था अगर अगली बार जमीन हमारे घर के नीचे धंस गई तो फिर क्या होगा. जिस जगह पर जमीन धंसी है वहां से कुछ ही दूरी पर सैकड़ों परिवार बसे हुए है.सबसे भयावह बात यह है कि सड़क के दोनों ओर जमीन के नीचे से आग अभी भी धधक रही है. कई जगहों से धुआं निकलता दिख रहा. लोग डर के साए में रहने को मजबूर है.
जिस स्थान पर धंसान हुआ है,उसके पास सीसीएल की महत्वपूर्ण ट्रांसपोर्टिंग सड़क है. जिसे क्षेत्र की जीवन रेखा माना जाता है. इस मार्ग से प्रतिदिन कोयला परिवहन होता है. ऐसे में आग और धंसान का खतरा केवल स्थानीय आबादी ही नहीं बल्कि औद्योगिक गतिविधियों के लिए भी चुनौती बन गया है. सवाल सिर्फ सड़क धंसने का नहीं है, सवाल उस आग का है जो वर्षों से धरती के सीने में जल रही है.सवाल उस खतरे का है जो हर दिन बढ़ रहा है. नीचे सुलगता खतरा है, ऊपर रोजमर्रा की जिंदगी चल रही है, लेकिन जब जमीन ही जवाब देने लगे, तो चिंता स्वाभाविक है.
सीसीएल ढोरी प्रबंधन वैकल्पिक सड़क और आगे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मंथन कर रहा है, लेकिन आज हुई धंसान की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खतरा अब केवल कागजों या फाइलों का विषय नहीं रह गया है.
कभी झरिया की आग देशभर की सुर्खियां बनती थी. आज बेरमो की धरती भी धुएं के साथ वही संदेश दे रही है कि आग चाहे कहीं भी हो, उसे नजरअंदाज करने की कीमत हमेशा भारी पड़ती है.आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि आग का दायरा बढ़ता रहा और धंसान की घटनाएं जारी रही तो इस घनी आबादी का भविष्य क्या होगा? क्या किसी बड़े हादसे से पहले स्थायी समाधान निकलेगा या फिर खतरे की यह चेतावनी भी समय के साथ फाइलों में दब जाएगी.