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टेंडर को लेकर नया विवाद : एक स्क्वायर मीटर की निविदा,पूरे अस्पताल का दिया ठेका,आरटीआई में हुआ खुलासा

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रांची: बोकारो सदर अस्पताल में सफाई व्यवस्था के लिए जारी किए गए टेंडर को लेकर नया विवाद सामने आया है. झारखंड कांट्रैक्टर्स एसोसिएशन द्वारा दायर आरटीआई से मिली जानकारी के बाद निविदा प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं. आरोप है कि जेम (GeM) पोर्टल पर केवल 1 स्क्वायर मीटर क्षेत्र की सफाई के लिए निविदा निकाली गई, लेकिन ठेका पूरे सदर अस्पताल की सफाई का दे दिया गया.

कमांडो कंपनी को मिला सफाई का काम

मिली जानकारी के अनुसार बोकारो सदर अस्पताल की सफाई का कार्य मेसर्स कमांडो इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स को सौंपा गया. जबकि टेंडर दस्तावेज में अस्पताल के कुल सफाई क्षेत्र,कार्य की मात्रा और अन्य आवश्यक विवरण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किए गए थे.

क्या कहते हैं नियम

सामान्य तौर पर किसी भी सफाई संबंधी टेंडर में यह उल्लेख करना जरूरी होता है कि कितने क्षेत्र की सफाई करनी है, कार्य की शर्तें क्या होंगी और भुगतान किस आधार पर किया जाएगा. लेकिन इस मामले में जेम पोर्टल पर केवल 1 स्क्वायर मीटर का क्षेत्र दर्शाए जाने का दावा किया जा रहा है.

आरटीआई के जवाब में क्या कहा गया

सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, बोकारो की ओर से आरटीआई के जवाब में बताया गया कि सफाई कार्य के लिए निविदा आमंत्रित की गई थी और एजेंसी ने उसी आधार पर अपनी दर प्रस्तुत की थी. जवाब में यह भी कहा गया कि GEM पोर्टल के प्रारूप के अनुसार कार्य की मात्रा और शर्तें पूर्व निर्धारित रहती हैं. आरटीआई जवाब के अनुसार विभाग द्वारा स्वीकृत कार्यक्षेत्र से अधिक क्षेत्र का कार्य आमंत्रित करना या उसका भुगतान करना नियमों के अनुरूप नहीं माना जाता है. यदि कार्यक्षेत्र बढ़ाने की आवश्यकता हो तो सक्षम पदाधिकारी से विधिवत स्वीकृति लेना और निविदा शर्तों के अनुरूप संशोधन करना आवश्यक है. अन्यथा निर्धारित सीमा से अधिक कार्य और उसका भुगतान नियमों का उल्लंघन माना जाएगा.

अब उठ रहे हैं ये सवाल

आरटीआई में मिले जवाब के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जेम पोर्टल पर केवल 1 स्क्वायर मीटर क्षेत्र के लिए निविदा जारी की गई थी, तो पूरे सदर अस्पताल की सफाई का कार्य एक ही एजेंसी को कैसे सौंप दिया गया.

आउटसोर्सिंग कंपनियों के दबदबे पर भी सवाल

राज्य में लंबे समय से कुछ चुनिंदा आउटसोर्सिंग कंपनियों के विभिन्न विभागों में लगातार काम मिलने को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं. कई एमएसएमई कंपनियों का आरोप है कि उन्हें या तो विभागों में इनपैनल नहीं किया जाता या फिर इनपैनल होने के बावजूद काम नहीं मिल पाता. ऐसे में बोकारो सदर अस्पताल का यह मामला आउटसोर्सिंग व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है.

जांच और जवाबदेही की मांग

झारखंड कॉन्ट्रैक्टर्स असोसिएशन ने अब मांग उठाई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि GEM पोर्टल पर जारी निविदा की शर्तों के अनुरूप ही कार्य आवंटित किया गया था या नहीं. साथ ही यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए. जिसके बाबत मुख्य सचिव को पत्र भी लिखा गया है.