Success Story : जो नौकरी की तलाश में थे, आज खुद दे रहे रोजगार, उद्यमियों ने कहा - रोजगार के लिए अब प्रदेश छोडकर जाने की जरुरत नहीं
पटना : 2024 में बिहार सरकार द्वारा शुरू की गयी लघु उद्यमी योजना ने गांव-गांव में आत्मनिर्भरता की नयी कहानी लिखी है. राज्य के 8053 पंचायतों में योजना लाभार्थियों ने अपने इलाकों में छोटे-छोटे उद्यमों को चालू कर सफल स्व-रोजगार का मिसाल कायम किया है. योजना का लाभ लेने वाले ग्रामीणों से बातचीत करने पर उन्होंने कहा कि हाथ में हुनर होने के बावजूद भी पूंजी न होने की वजह से व्यापार शुरू करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे. जिसके कारण योजना से पहले रोजगार के लिए दूसरे प्रदेशों में जाकर मजदूरी व पर्यवेक्षक की नौकरी किया करते थे. साल 2024 में बिहार लघु उद्यमी योजना का लाभ लेकर आज अपने गांव में ही महीने का 25 हजार तक कमा रहे हैं.
हुनर था लेकिन पूंजी नहीं,योजना ने दिलाई नई पहचान
वैशाली लालगंज के पोझिंया गांव निवासी लाभार्थी रवि कुमार शर्मा ने कहा कि वे अलग-अलग जगहों पर वेल्डिंग और फेब्रीकेशन का काम किया करते हैं. हाथ में हुनर होने के बावजूद भी उनके पास खुद का उद्योग शुरू करने के लिए पुंजी न होने के कारण खुद का उद्यमी नहीं लगा पा रहे थे. साल 2024 में बिहार लघु उद्यमी योजना की शुरूआत होने के बाद योजना के लिए आवेदन किया और अंतिम रूप से चयनित होने पर प्राप्त सहायता राशि से गेट ग्रील का उद्योग लगाया. आज वे अपने गांव में ही महीने का लगभग 25 हजार कमा रहे हैं,साथ ही उन्होंने अपने गांव में ही अन्य को रोजगार भी दे रहे हैं.
वैशाली के युवाओं ने दिखाया दम,गांव में ही खड़ा किया कारोबार
वहीं वैशाली के भगवानपुर निवासी सकिन्द्र कुमार ने बताया कि वह अपनी पढाई पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी पाने की लगातार कोशिश कर रहे थे. घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार पर बोझ बढ़ता जा रहा था. वे अपने गांव में रहकर ही खूद को आत्मनिर्भर बनाना चाहते थे. उन्हें जिला उद्योग केन्द्र,वैशाली के माध्यम से बिहार लघु उद्यमी योजना के बारे में जानकारी मिली. उन्होंने योजना के तहत आवेदन किया और अंतिम रूप से चयनित होने के बाद प्राप्त सहायता राशि से मसाला का उद्योग लगाया. आज वे अपने गांव में स्व-रोजगार लगाकर महीने का लगभग 15000 तक की कमाई कर रहे हैं.