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सरायकेला में स्वास्थ्य विभाग भगवान भरोसे : जच्चा-बच्चा की मौत के बाद प्रशासन अलर्ट,पीएचसी में एक भी डॉक्टर नहीं, हालत दयनीय

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सरायकेला: जिले में बीते दिनों राजनगर अस्पताल में हुई जच्चा- बच्चा की मौत की घटना के बाद जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है. उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह के निर्देश पर कुकड़ू बीडीओ राजश्री ललिता बाखला और कुकड़ू प्रभारी अंचल अधिकारी अभय कुमार द्विवेदी ने तिरुलडीह प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया.

प्रभारी अंचल अधिकारी नेबारीकी से किया निरीक्षण

इस दौरान प्रभारी अंचल अधिकारी अभय कुमार द्विवेदी ने बताया कि तिरुलडीह प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र का बारीकी से निरीक्षण किया गया. जिसमें मानव संसाधन के साथ साथ उपलब्ध सेवा, मशनिरी एवं दवाइयों का भी जायजा लिया गया. उन्होंने कहा कि डॉक्टर,जेनरेटर,एक्सरे मशीन ऑपरेटर का अभाव है. उन्होंने जिला को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.

उप स्वास्थ्य केंद्र में सिस्टम की कुव्यवस्था

बीडीओ राजश्री ललिता बाखला ने बताया कि अभिलेख का भी निरीक्षण किया गया है. प्रति माह लगभग 30-40 महिलाओं का प्रसव होता है. उन्होंने देखा कि भी यहां पीएचसी में एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं है.

एएनएम के भरोसे प्रसव

आपको बता दें कि तिरुलडीह प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र भारी कुव्यवस्था है. यहां दो एएनएम, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट प्रतिनियुक्ति है, परंतु यहां एक भी डॉक्टर उपलब्ध नहीं है. यहां तक कि प्रसव भी एएनएम के भरोसे होता है. गनीमत है कि प्रसव के दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं घटती है, पर सवाल है कि बिना डॉक्टरों के प्रसव कराना कहा तक सुरक्षित माना जा सकता है.

क्षेत्र के लोग मजबूरनडॉक्टर बिनाप्रसव कराने को मजबूर

ऐसे में प्रसव पूर्व मां एवं नवजात का स्वास्थ्य किसके भरोसे रहता है. क्षेत्र के लोग मजबूरन बिना डॉक्टर के ही प्रसव कराने को मजबूर है जो झारखण्ड के स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है.