मंत्री अशोक चौधरी बोले : गाद नीति से बिहार को मिलेगा फायदा, GDP पर केंद्र के वित्तीय प्रबंधन की सराहना
पटना : गंगा बेसिन में लगातार बढ़ रही गाद की समस्या को लेकर मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि गंगा की मौजूदा स्थिति को देखते हुए स्पष्ट गाद नीति बनाए जाने की जरूरत है. अगर गाद नीति बनती है तो इसका सीधा फायदा बिहार को मिलेगा.
देश की जीडीपी वृद्धि को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में भी अगर देश की जीडीपी7.8प्रतिशत की दर से बढ़ रही है,तो यह केंद्र सरकार के मजबूत और सफल वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट संकट के बाद गैस और पेट्रोलियम की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ महंगाई का दबाव भी बढ़ा,लेकिन इसके बावजूद भारत अपनी जीडीपी ग्रोथ को बनाए रखने में सफल रहा है. ऐसे में सिर्फ राजनीतिक विरोध के लिए आर्थिक उपलब्धियों पर सवाल उठाना उचित नहीं है.
उन्होंने विपक्ष की राजनीति पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी विपक्ष में रहते हुए भी देशहित और विदेश नीति के मुद्दों पर सरकार के साथ खड़े होते थे. इसके विपरीत आज विपक्ष के नेता विदेशों में जाकर भारत की विदेश नीति और प्रधानमंत्री पर सवाल उठाते हैं. उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक सोच और राजनीति की गुणवत्ता में अंतर को दर्शाता है.
मछलियों की मौत पर एडवाइजरी
हिमालयी क्षेत्रों में मछलियों की मौत और उन्हें खाने को लेकर जारी एडवाइजरी पर मंत्री ने कहा कि हिमालय क्षेत्र में करीब एक हजार से ग्यारह सौ जल निकाय हैं,जो अलग-अलग और दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं. इन जल निकायों में मछलियां पाई जाती हैं,लेकिन विषम परिस्थितियों में मरने वाली मछलियां मानव उपभोग के लिए सुरक्षित नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि सरकार मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को लगातार जागरूक कर रही है और लोगों से अपील की जा रही है कि मृत अवस्था में मिलने वाली मछलियों का सेवन न करें. उन्होंने यह भी कहा कि मछलियों के प्रजनन के समय उनके सेवन को लेकर भी लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है.
आरक्षण पर बोले—कोई समझौता नहीं
आरक्षण की समीक्षा को लेकर चल रही बहस पर मंत्री ने इसे बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा बताया. उन्होंने कहा कि आरक्षण संविधान से प्रदत्त अधिकार है और इस पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता.
उन्होंने कहा कि अगर आरक्षण को लेकर समीक्षा या बदलाव की जरूरत महसूस होती है,तो इस पर बहस मीडिया में नहीं,बल्कि संसद में होनी चाहिए. संसद को ही इस तरह के संवेदनशील संवैधानिक विषयों पर चर्चा करने का अधिकार है.
मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि उनके नेता ने दलित आयोग का गठन किया है और वे अपने नेताओं तथा अपनी विचारधारा के अनुसार ही इस मुद्दे पर आगे बढ़ेंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी के बजाय संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए.
पटना से राजीव रंजन की रिपोर्ट--