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बंगाल स्थापना दिवस : राज्यपाल संतोष गंगवार हुए शामिल,बोले-बंगाल की समृद्ध सांस्कृति,परंपरा प्रेरणा का स्रोत

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रांची:झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने शनिवार को लोक भवन में आयोजित पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए. इस मौके पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने झारखंड में रह रहे बंगालवासियों को शुभकामनाएं दीं.पश्चिम बंगालवासियों को राज्यपाल ने संबोधित किया. उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है. यहां अनेक भाषाओं, संस्कृतियों, परंपराओं और जीवन-पद्धतियों का संगम है. भिन्नताओं के बावजूद “विविधता में एकता” हमारी सबसे बड़ी शक्ति है. राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री का “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” पहल विभिन्न राज्यों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पारस्परिक समझ और भावनात्मक एकता को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है.

'बंगाल की धरती ज्ञान, सृजनशीलता और सांस्कृतिक चेतना की भूमि है'

पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस समारोह में राज्यपाल ने कहा किझारखण्ड और पश्चिम बंगाल का संबंध केवल भौगोलिक निकटता तक सीमित नहीं है,बल्कि दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक,सामाजिक और भावनात्मक संबंध भी अत्यंत गहरे हैं. उन्होंने झारखण्ड में निवासरत बंगाली समाज के शिक्षा, संस्कृति, उद्योग, व्यापार और सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में दिए गए उल्लेखनीय योगदान की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी है. बंगाल की धरती ज्ञान, सृजनशीलता और सांस्कृतिक चेतना की भूमि रही है. सामाजिक पुनर्जागरण से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक बंगाल ने राष्ट्र निर्माण में ऐतिहासिक योगदान दिया है. साहित्य, संगीत, कला और सिनेमा के क्षेत्र में बंगाल का योगदान अविस्मरणीय है. महान फिल्मकार सत्यजीत रे ने भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाई. बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, सृजनशीलता और बौद्धिक विरासत आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा की स्रोत बनी हुई है.

राज्यपाल नेबंगाल की संस्कृति की सराहना की

राज्यपाल ने बंगाल की उत्सवधर्मी संस्कृति की सराहना करते हुए कहा कि दुर्गा पूजा और काली पूजा जैसे पर्व केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं हैं,बल्कि सामाजिक समरसता, सामूहिकता और सांस्कृतिक वैभव के उत्सव भी है. इन आयोजनों के माध्यम से बंगाल की सांस्कृतिक पहचान देश और दुनिया के सामने उजागर होती है. उन्होंने कहा कि बंगाल की पाक-परंपरा अपनी विशिष्टता, विविधता और आत्मीयता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है. पारंपरिक व्यंजनों की मिठास और बांग्ला भाषा की मधुरता वहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का परिचायक है.