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‎कर्नाटक में VIP की एंट्री : मुख्यमंत्री बनना लक्ष्य नहीं, समाज में बदलाव लाना मेरा सपना-मुकेश सहनी

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‎पटना/बेंगलुरु:विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने कर्नाटक में अपने राजनीतिक विस्तार की औपचारिक शुरुआत करते हुए राज्य में संगठन निर्माण और सामाजिक न्याय के आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है. इस अवसर पर आयोजित भव्य समारोह को संबोधित करते हुए वीआईपी के संस्थापक एवं बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने कहा कि पार्टी का उद्देश्य केवल चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि देश के वंचित, पिछड़े, निषाद, कोली और मेहनतकश समाज को उनका सम्मान और अधिकार दिलाना है. इस मौके पर वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी का भव्य स्वागत किया गया.

मुकेश सहनी ने बताया अपना संघर्ष

‎वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने कहा कि वे अत्यंत साधारण मछुआरा परिवार से आते हैं और गरीबी तथा संघर्ष को बेहद करीब से देखा है. उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि मजदूरी से लेकर सफल उद्यमी बनने तक का सफर समाज और संतों के आशीर्वाद से संभव हुआ है, लेकिन जब उन्होंने अपने समाज की बदहाल स्थिति देखी तो उन्होंने आरामदायक जीवन छोड़कर सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष का रास्ता चुना.

वीआईपी विसंगति को दूर करने के लिए संघर्ष कर रही

‎उन्होंने कहा कि निषाद समाज देशभर में कई नामों से जाना जाता है, लेकिन विभिन्न राज्यों में उनकी सामाजिक श्रेणियां अलग-अलग हैं. कहीं एससी, कहीं एसटी और कहीं ओबीसी के रूप में उन्हें वर्गीकृत किया गया है. यह सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है और वीआईपी इसी विसंगति को दूर करने के लिए संघर्ष कर रही है.

समाज में स्थायी बदलाव लाना लक्ष्य-मुकेश सहनी

‎अपने संबोधन में सहनी ने कहा कि उनका लक्ष्य सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज में स्थायी बदलाव लाना है. उन्होंने कहा कि यदि वह समझौता कर लेते तो आज बिहार के मुख्यमंत्री बन सकते थे,लेकिन उन्होंने समाज के हितों को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर रखा. उन्होंने कहा कि "झोपड़ी में रहकर बादशाह बनना बेहतर है, किसी के महल में गुलामी करने से।"

'‎वीआईपी कर्नाटक में मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरेगी'

‎उन्होंने कर्नाटक वीआईपी के प्रदेश अध्यक्ष बी.के. मोहन कुमार को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आने वाले समय में उन्हें अनेक राजनीतिक प्रलोभन मिलेंगे,लेकिन यदि समाज के हितों के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे तो जनता उन्हें बड़ी जिम्मेदारियों तक पहुंचाएगी. उन्होंने विश्वास जताया कि बी.के मोहन कुमार के नेतृत्व में वीआईपी कर्नाटक में एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरेगी।

'वीआईपी सामाजिक न्याय, भागीदारी और अधिकार की लड़ाई लड़ रही'

‎मुकेश सहनी ने कहा कि बाबा साहब डॉ.भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए मतदान के अधिकार ने गरीब और अमीर को समान ताकत दी है. इसी लोकतांत्रिक शक्ति के आधार पर वीआईपी सामाजिक न्याय, भागीदारी और अधिकार की लड़ाई लड़ रही है. उन्होंने दोहराया कि "जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी" का सिद्धांत ही देश में वास्तविक सामाजिक न्याय स्थापित कर सकता है.‎उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद वह कर्नाटक का व्यापक दौरा करेंगे और यहां संकल्प यात्रा निकालकर समाज के बीच संवाद स्थापित करेंगे. उन्होंने सभी जाति, धर्म और वर्ग के लोगों को साथ लेकर सामाजिक परिवर्तन का आंदोलन मजबूत करने का आह्वान किया।

संत समाज के प्रति विशेष सम्मानव्यक्त

‎समारोह के अंत में मुकेश सहनी ने संत समाज के प्रति विशेष सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि कर्नाटक में पहली बार इतने बड़े स्तर पर संतों का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है और इसी आशीर्वाद के बल पर वीआईपी राज्य में नई राजनीतिक चेतना का निर्माण करेगी। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सामाजिक न्याय और समान भागीदारी की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया.