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JHARKHAND NEWS : भ्रष्टाचार का पर्दाफाश: अभय तिवारी के बड़े खुलासे—25 लाख में FRO और 35 लाख में बिका ACF पद

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JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) परीक्षा घोटाले में मास्टरमाइंड अभय तिवारी के बयानों ने सबको हिला कर रख दिया है।अभय तिवारी ने अपने कबूलनामे में बताया है कि उसने अभ्यर्थियों से कुल 5 करोड़ 80 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम वसूली थी! इस काले कारोबार में पदों की बाकायदा बोली लगती थी—FRO यानी वन क्षेत्र पदाधिकारी के एक पद की बोली 20 से 25 लाख, और ACF यानी सहायक वन संरक्षक के पद की बोली 30 से 35 लाख रुपये में तय हुई थी।जांच में खुलासा हुआ है कि अभय और उसके दलालों ने अलग-अलग शहरों से एजेंटों के जरिए कैंडिडेट्स को फंसाया। इस सिंडिकेट ने कुल 20 अभ्यर्थी दिए—जिनमें FRO के 12 और ACF के 8 उम्मीदवार शामिल थे।इनमें से 19 कैंडिडेट पास हो गए, और सिर्फ छत्तरपुर निवासी संतोष राम ही परीक्षा में फेल हुआ।

सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी धांधली में खियांग्ते द्वारा जबरन रिजल्ट निकलवाने की बात भी सामने आ रही है। इस अवैध वसूली में से अकेले 1 करोड़ रुपये अभय तिवारी ने अपने पास रखे थे। बाकी रकम दलालों और बड़े चेहरों के बीच बांटी गई।सवाल यह उठता है कि आखिर अभय तिवारी इस जुर्म की दुनिया में दाखिल कैसे हुआ?रांची के हरमू इलाके में उमेश कुमार के साथ मात्र 10 लाख रुपये की पूंजी लगाकर एक होटल से इसकी शुरुआत हुई थी। इसके बाद दोनों ने स्टेशन रोड पर 'प्रकाश रेसिडेंसी' होटल खोला। होटल के बाद अभय ने 'जिवनकेसी सप्लाई एंड सर्विसेज' के नाम से एक मैनपावर सप्लाई एजेंसी शुरू की।इसी एजेंसी के जरिए उसकी मुलाकात दिल्ली के शैंटी और कोडरमा के लालू से हुई। और यहीं से उसके तार टीडीपीएल (TDPL) के निदेशक सतपाल सिंह और रामवीर सिंह से जुड़े, जिसके बाद शुरू हुआ नौकरियों की खरीद-फरोख्त का यह गंदा खेल।