JHARKHAND NEWS : फेल हुए तो क्या हुआ? पलामू जिला स्कूल में 'सेटिंग' से मिल रहा एडमिशन!
पलामू के प्रतिष्ठित जिला स्कूल—जो अब 'सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस' बन चुका है—वहाँ योग्यता को ताक पर रखकर अवैध वसूली और बैकडोर से नामांकन का एक बड़ा खेल चल रहा है।"सरकारी दावों के विपरीत, प्रवेश परीक्षा में फेल हो चुके अयोग्य बच्चों से मोटी रकम लेकर उन्हें धड़ल्ले से दाखिला दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरी धांधली का पर्दाफाश एक व्हाट्सएप लिस्ट से हुआ है।सूत्रों के मुताबिक, पलामू के पूर्व डीईओ सौरभ प्रकाश और शिक्षा विभाग के कई रसूखदारों की भेजी गई गुप्त सूची के आधार पर सीटों की खुली बोली लगाई गई।
कई गरीब अभिभावकों ने अपने बच्चों के दाखिले के लिए मां के गहने तक बेच दिए, लेकिन इस भ्रष्ट तंत्र ने रात-दिन मेहनत करने वाले मेधावी छात्रों के सपनों पर पानी फेर दिया।झारखंड सरकार का लक्ष्य राज्य के 80 उत्कृष्ट विद्यालयों के जरिए गरीब बच्चों को मुफ्त हाई-टेक लैब, लाइब्रेरी और विश्वस्तरीय शिक्षा देना है। लेकिन पलामू में अफसरों और बिचौलियों के गठजोड़ ने इस महत्वाकांक्षी योजना को अवैध कमाई का जरिया बना दिया है।यही नहीं, विद्यालय का शैक्षणिक माहौल पूरी तरह दूषित हो चुका है। जीव विज्ञान के शिक्षक बलराम शाह पर 11वीं कक्षा की एक छात्रा के साथ दुर्व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगा है। विडंबना यह है कि इस शर्मनाक घटना के बाद सदमे में आई छात्रा को अपनी पढ़ाई तक छोड़नी पड़ी, जिसकी जांच फिलहाल एक प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी कर रहे हैं।योग्य और गरीब छात्र आज इस व्यवस्था के सामने खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इस पूरे एडमिशन सिंडिकेट और भ्रष्ट आचरण के खिलाफ उच्च स्तरीय व निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।