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गिरिडीह : इफको देवघर की ओर से बिक्री केंद्र प्रभारी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

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गिरिडीह:जिले के खंडोली,बेंगाबाद में इफको देवघर द्वारा बिक्री केंद्र प्रभारी प्रशिक्षण कार्यक्रम सह सहयोग से समृद्धि कार्यक्रम का आयोजन किया गया.राज्य विपणन प्रबंधक डॉ. शशिभूषण समदर्शी,इफको MC क्रॉप साइंस के नेशनल हेड, संजीव कुमार,इफको MC क्रॉप साइंस के जोनल हेड, विनय मणि त्रिपाठी,इफको देवघर क्षेत्र अधिकारी नवीन राय,इफको गिरिडीह के sfa नवीन कुमार,गिरिडीह जिला 50लैम्प्स/पैक्स के प्रबंधक सह बिक्री केंद्र प्रभारी एवं 6 प्रगतिशील कृषक बंधुओं ने भाग लिया.

इस मौके पर डॉ.शशिभूषण समदर्शी ने किसानों एवं बिक्री केंद्र प्रभारियों को विकृत कृषि पद्धतियों से मिट्टी में जलवायु में हो रही क्षति के बारे में बताते हुए कहा कि झारखंड के मिट्टी में आयरन एवं एल्यूमीनियम होने की वजह से यहां की मिट्टी अम्लीय है. उन्होंने बताया कि पारंपरिक दानेदार यूरिया मिट्टी की अम्लीयता को और भी ज्यादा बढ़ाता है. अम्लीय मिट्टी सब्जीवर्गीय फसलों के लिए उपयुक्त नहीं है और वे सब्जीवर्गीय फसलों में अनेक प्रकार की बीमारियों को जन्म देते हैं और फसलों के पैदावार में भी नकारात्मक प्रभाव डालते हैं.इसलिए किसान बंधु दानेदार यूरिया की जगह कैल्शियम नाइट्रेट का उपयोग करें असंतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों के उपयोग एवं कार्बनिक उर्वरकों के उपयोग की कमी की वजह से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ 0.5% से भी निचले स्तर में पहुंच गए हैं. जिससे मिट्टी में उपयोगी सुक्ष्म जीव कम होते जा रहे हैं एवं किछुआ की भी खेत से खत्म होते जा रहे हैं.

वर्तमान परिवेश में ये बहुत महत्वपूर्ण है कि किसान बंधु धान की पराली को न जलाएं एवं इफको द्वारा बनाए जाने वाले बायोडकंपोजर का उपयोग करके, पराली से कम्पोस्ट बनाएं एवं मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाएं जिससे मिट्टी को उर्वरक क्षमता बढ़ सके. उन्होंने मिट्टी को बचाने के लिए रासायनिक उर्वरकों की मात्रा को आधा करके नैनो उर्वरकों की उपयोग पर जोर दिया एवं उसकी सम्पूर्ण विधि को बताते हुए उन्होंने पौधों में आवश्यक विभिन्न पोषक तत्वों की भूमिका को क्रमवार तरीके से समझाया और बताया कि पारंपरिक यूरिया की उपयोग दक्षता केवल 30–35% तथा पारंपरिक डीएपी की उपयोग दक्षता मात्र 15–20% होती है. इसके असंतुलित उपयोग से फसलों में कई प्रकार के पोषण विकार उत्पन्न होते हैं.इफको MC क्रॉप साइंस के जोनल मैनेजर ने इफको के अभी खरीफ मौसम में फसल वार दवा एवं घास के दवा की बात कही गई.

वहीं, नवीन राय ने किसानों को विभिन्न फसलों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया. इसके अलावा उन्होंने धान में लगने वाली प्रमुख बीमारियों, उनके लक्षण और समाधान पर विस्तृत चर्चा की और इफको के अन्य उत्पादों जैसे नैनो जिंक, सागरिका, तरल कंसोर्टिया, जिंक सल्फेट मोनो और कैल्शियम नाइट्रेट की जानकारी भी दी.

नैनो जिंक के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इसका डोज 1 मिली प्रति लीटर पानी है. इसके प्रयोग से धान में खैरा रोग नहीं होता, अधिक कल्ले निकलते हैं, पत्तियां चौड़ी होती हैं तथा दानों का भराव अच्छा होता है, जिससे उपज में वृद्धि होती है.

कंसोर्टिया के संबंध में उन्होंने बताया कि इसका उपयोग बीज उपचार, जड़ उपचार और मृदा उपचार के रूप में किया जा सकता है. यह जैविक खेती के लिए उपयुक्त है, जिससे रासायनिक खाद की खपत 15–20% तक कम होती है तथा उपज 10–20% तक बढ़ती है. साथ ही यह मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या को बढ़ाता है और खेती की लागत को कम करता है.

संजीव कुमार ने इफको MC के खर पतवार नाशक,अलग धन मक्का लगने वाले कीट पतंग की जानकारी दी.धन्यवाद ज्ञापन श्री श्रीवास्तव, इफको क्रॉप साइंस द्वारा किया गया.