Hindi News / राजकीय बुनियादी विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी,छात्र बिना पढ़ाई किए घर लौटने...

बोकारो में शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल : राजकीय बुनियादी विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी,छात्र बिना पढ़ाई किए घर लौटने को मजबूर

Edited By:  |
bokaro mein siksha vyawastha ki khuli pole

बोकारो:राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है. चास प्रखंड स्थित पिंडराजोरा के राजकीय बुनियादी विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. नौनिहालों का भविष्य अंधकारमय है. हालात ऐसे हैं कि स्कूल में बच्चे तो रोज पहुंच रहे हैं, लेकिन कई कक्षाओं में पढ़ाने वाला कोई शिक्षक ही नहीं है. आलम ये है कि छात्र बिना पढ़ाई के ही घर लौटने को मजबूर है.

मामला चास प्रखंड के पिंडराजोरा स्थित राजकीय बुनियादी विद्यालय का है. वर्ष 1948 में स्थापित इस विद्यालय में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाई होती है। लेकिन वर्तमान में पूरे विद्यालय की जिम्मेदारी मात्र एक सहायक आचार्य के कंधों पर है.

प्रतिनियुक्त सहायक शिक्षक कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ विद्यालय के अन्य प्रशासनिक कार्य भी संभाल रहे हैं. वहीं, कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इन कक्षाओं के छात्र स्कूल तो पहुंचते हैं, लेकिन नियमित पढ़ाई नहीं होने के कारण उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है.

छात्रों का कहना है कि उनकी नियमित पढ़ाई नहीं हो रही है. मजबूरी में वे खुद से पढ़ाई करने का प्रयास करते हैं, लेकिन शिक्षकों के अभाव में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं,स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष दिलीप गोप का कहना है कि शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है. कई बार शिक्षकों की मांग की गई,लेकिन अब तक पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं.

विद्यालय में प्रतिनियुक्त सहायक शिक्षक युधिष्ठिर महतो ने बताया कि उन्हें करीब दो महीने पहले इस विद्यालय में प्रतिनियुक्त किया गया है. वे कक्षा 1 से 5 तक की पढ़ाई कराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कक्षा 6 से 8 तक मुख्य विषयों के शिक्षक नहीं होने के कारण उन बच्चों की पढ़ाई बाधिक हो रही है.

वहीं,इस गंभीर मामले पर जिला शिक्षा अधीक्षक अतुल चौबे का कहना है कि विद्यालय में शिक्षकों का पद स्वीकृत नहीं होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है. हालांकि,उन्होंने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए जल्द विद्यालय में शिक्षकों की व्यवस्था करने की बात कही है.