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BIHAR NEWS : नाबालिग बच्चों की कस्टडी से जुड़े मामले में पटना हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय के आदेश को किया रद्द

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Patna : पटना हाईकोर्ट ने नाबालिग बच्चों की कस्टडी से जुड़े एक मामले में कहा है कि बच्चों की इच्छा और उनका कल्याण ही सर्वोपरि है. कोर्ट ने जहानाबाद परिवार न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए दोनों नाबालिग बच्चों की कस्टडी मां से वापस ले पिता को सौंपा.

जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने शक्ति किशोर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की. कोर्ट को बताया गया कि 2011 में शादी करने वाले दंपती अगस्त 2018 से अलग रह रहे हैं.

अलग होने के समय बेटी करीब ढाई वर्ष और बेटा आठ माह का था. तब से दोनों बच्चे पिता और उसके परिवार के साथ रह रहे थे. जहानाबाद परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश ने 6 सितंबर,2024 को मां की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए बच्चों की कस्टडी मां को दे दिया और पिता को मिलने का अधिकार देने का आदेश दिया.

इस आदेश की वैधता को पिता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी. पिता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बच्चे कई सालों से पिता के साथ हैं,वहीं पढ़ रहे हैं. काउंसलिंग और कोर्ट से बातचीत में भी बच्चों ने पिता के साथ रहने की इच्छा जताई.

कोर्ट ने कहा कि हिंदू अल्पवयस्कता और संरक्षकता कानून की धारा 13 के तहत बच्चे का कल्याण ही सबसे बड़ा आधार है. कोई भी व्यक्ति केवल कानूनी अधिकार के आधार पर कस्टडी का दावा नहीं कर सकता.

कोर्ट ने माना कि आज की परिस्थितियां 2019 में केस दायर होने के समय से बिल्कुल विपरीत हैं. बच्चे अपने बचपन के कई साल पिता के साथ बिता चुके हैं. उनकी पढ़ाई और सामाजिक माहौल वहीं स्थिर है.

कोर्ट ने कहा कि बच्चे की पसंद ही एकमात्र आधार नहीं हो सकता,लेकिन जब बच्चे समझदार हो गए हों,तो उनकी बुद्धिमत्तापूर्ण पसंद को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता.

कोर्ट ने परिवार न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि बच्चों की कस्टडी पिता के पास ही रहेगी. हालांकि,मां को बच्चों से मिलने और बात करने का पूरा अधिकार रहेगा और पिता को इसमें सहयोग करना होगा. दोनों माता-पिता बच्चों के सामने एक-दूसरे के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं करेंगे.

पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-