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BIHAR NEWS : पटना हाईकोर्ट में वाई-फाई युक्त हाईस्पीड इंटरनेट की उपलब्धता पर हुई सुनवाई

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Patna : पटना हाईकोर्ट के परिसर और कोर्ट रूम में समयबद्ध तरीके से उच्च गति की इंटरनेट कनेक्टिविटी,जिसमें वाई-फाई सुविधा भी शामिल हो,उपलब्ध करवाए जाने के मामले पर सुनवाई हुई. अधिवक्ता ओमप्रकाश कुमार की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए बीएसएनएल और बेल्ट्रॉन को पार्टी बनाने का आदेश दिया.

कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट प्रशासन के अधिवक्ता को अब तक इस सम्बन्ध में की गयी कार्रवाईयों का ब्यौरा देने का निर्देश दिया. साथ ही वाई फाई उपलब्ध करने में क्या कदम उठाये गये,इसका भी ब्यौरा कोर्ट ने दो सप्ताह में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता को रजिस्ट्रार जनरल से जानकारी लेकर ये बताने को कहा था कि इस मामले में क्या कार्रवाई की जा रही है. इस सम्बन्ध में वे कोर्ट को ब्यौरा दें.

कोर्ट में याचिकाकर्ता अधिवक्ता ओमप्रकाश को निर्देश दिया था कि अगली सुनवाई में भारत संचार निगम लिमिटेड और बेल्ट्रॉन को पार्टी बना कर उन्हें भी याचिका की कॉपी दी जाये.

अधिवक्ता ओम प्रकाश ने अपनी जनहित याचिका में ये मांग की है कि पटना हाईकोर्ट के परिसर के भीतर इंटरनेट और वाई-फाई सुविधाओं के नियमित रख रखाव,सुरक्षा और निर्बाध संचालन के लिए एक व्यापक और प्रभावी नीति तैयार किया जाए.

इससे डिजिटल न्यायिक सेवाओं का प्रभाव सुनिश्चित हो सके औऱ भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत मौलिक अधिकार का उल्लंघन ना हो सके.

उन्होंने अपने जनहित याचिका में ये कहा है कि पटना हाईकोर्ट ने ई-कोर्ट प्रणाली,वर्चुअल हाइब्रिड सुनवाई,ऑनलाइन कॉज लिस्ट,डिजिटल केस प्रबंधन प्रणाली और ई-फाइलिंग जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनाया है.

पटना हाईकोर्ट में उपलब्ध इंटरनेट अत्यंत अपर्याप्त है. हाईकोर्ट के कोर्ट रूम,गलियारों और परिसर में तो यह लगभग न के बराबर है.

इसके परिणामस्वरूप ई-फाइलिंग पोर्टल,वर्चुअल सुनवाई प्लेटफॉर्म,ऑनलाइन केस लिस्ट और डिजिटल रिकॉर्ड तक पहुंच में बार-बार व्यवधान उत्पन्न होता है.

इससे वादियों,अधिवक्ताओं और अन्य सभी हितधारकों के लिए न्याय के सुचारू,कुशल और समयबद्ध प्रशासन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न होती है.

अधिवक्ता ओम प्रकाश ने जनहित याचिका में ये कहा है कि बिहार सरकार एवं हाइकोर्ट के महानिबंधक भी मौजूदा परिस्थितियों और कोर्ट परिसर में अपर्याप्त और कई कोर्ट में इंटरनेट कनेक्टिविटी के न होने से उत्पन्न गंभीर परिणामों से पूरी तरह अवगत हैं.

फिर भी अधिकारियों की निरंतर निष्क्रियता और उदासीनता के कारण वकीलों द्वारा झेली जा रही लगातार कठिनाइयों और परेशानियों को जानबूझकर अनदेखा किया है. इससे अदालतों के कामकाज में गंभीर बाधा उत्पन्न हो रही है.

इस मामले पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी.

पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट--