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BIHAR NEWS : मुंगेर मॉडल - गंदे तालाब से निकला साफ पानी, हजारों को राहत

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पटना : जलाशयों के प्रदूषित जल को उपयोग में लाने के लिए मुंगेर के ग्राम पंचायत बांक में नया प्रयोग हुआ है. ग्राम पंचायत में काफी पुराना और प्रदूषित जल से भरे तालाब में अपशिष्ट स्थिरीकरण तालाब (डब्ल्यूएसपी) के सहारे ग्रे वाटर को स्वच्छ और उपयोगी जल बनाने में बड़ी सफलता मिली है. तालाब के पानी के शुद्ध होने से पर्यावरण सुरक्षा के साथ हजारों ग्रामीणों की जल आवश्यकता की पूर्ति और ग्राउंड वाटर रिचार्ज की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ गया है.

ग्रामीणों का कहना है कि मुंगेर के बांक पंचायत का सिद्धि तालाब कुछ दशक पहले तक जिले की शान हुआ करता था. बाद में इस तालाब की अनदेखी और इसमें चारों तरफ से आने वाले धूसर जल (ग्रे वाटर) ने इसकी शान को पूरी तरह नष्ट कर दिया. गांव के5000परिवारों द्वारा उपयोग किया हुआ धूसर जल नालों के माध्यम से तालाब में पहुंचता था.वहीं नगर निगम क्षेत्र से भी नालों का पानी इस तालाब में आता था. बरसात के दिनों में चारों ओर से गंदा पानी इसी तालाब में आता था. इस तरह विभिन्न स्रोतों से आने वाले धूसर एवं प्रदूषित जल तालाब के पानी को प्रदूषित कर रहा था. इन सब कारणों से धीरे-धीरे तालाब का पानी पूरी तरह प्रदूषित हो गया. स्थिति यहां तक हो गई कि इसका पानी खतरनाक स्तर तक प्रदूषित होता चला गया और इंसान के साथ-साथ अन्य जीवों के उपयोग के लायक नहीं बचा.

पर्यावरणविदों के अनुसार तालाब का प्रदूषित जल भू-गर्भ जल को भी प्रभावित करने लगा था. स्थिति की भयावहता को देखते हुए जिला जल एवं स्वच्छता समिति ने तालाब के पानी को स्वच्छ बनाने के लिए अपशिष्ट स्थिरीकरण तालाब (डब्ल्यूएसपी) निर्माण का फैसला लिया. इस पहल के तहत अब सिद्धि तालाब में आने वाले गंदे एवं धूसर जल को पहले डब्ल्यूएसपी में जमा किया जाता है. यहां पानी कई दिनों तक उपचारित होता है. फिर उपचारित किया हुआ साफ पानी दूसरी तरफ से सिद्धि तालाब में जमा होता है. मौजूदा समय में तालाब के पानी के साफ हो जाने से ग्राम पंचायत में करीब पांच हजार से अधिक की आबादी को रोजमर्रे की जरूरतें पूरी हो रही हैं. साथ ही ग्राउंड वाटर रिचार्ज करने की भी नई राह बनी है. आज यह तालाब मत्स्य पालन के लिए पूरी तरह से उपयोगी बन चुका है.