BIHAR NEWS : पटना HC ने अधिकारी पर सरकार द्वारा की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को किया रद्द
Patna : पटना हाईकोर्ट ने श्रम संसाधन विभाग,बिहार सरकार द्वारा एक अधिकारी पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को असंवैधानिक और गैर-कानूनी करार देते हुए रद्द कर दिया है. जस्टिस कुमार मनीष की एकल पीठ ने पंकज कुमार (तत्कालीन प्राचार्य-सह-केंद्र अधीक्षक,सरकारी आईटीआई महकार,गया) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण निर्णय दिया.
कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि केवल समाचार पत्र में छपी रिपोर्ट या फोटो के आधार पर किसी कर्मचारी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक पत्रकार या फोटोग्राफर की अदालत/जांच में गवाही न हो,तब तक अखबार की खबर मात्र सुनी-सुनाई बातें हैं.
ये मामला जुलाई2018परीक्षा से सम्बन्धित हैं. आईटीआई महकार,गया में आल इंडिया ट्रेड टेस्ट आयोजित हुआ था. दंडाधिकारी और प्रेक्षक की आधिकारिक रिपोर्ट में परीक्षा को पूरी तरह शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बताया गया था.
परीक्षा के अगले दिन दैनिक समाचार पत्र में कुप्रबंधन और देरी को लेकर एक खबर प्रकाशित हुई. श्रम संसाधन विभाग ने11नवंबर, 2019को बिना किसी प्रत्यक्ष गवाह और बिना किसी निष्पक्ष विभागीय जांच के,पंकज कुमार का वार्षिक निंदा प्रस्ताव पारित कर दिया और तीन वेतन वृद्धि पर रोक लगा दी.
याचिकाकर्ता ने अपना पक्ष रखने के लिए सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी रिपोर्ट की मांग की थी,जिसे विभाग ने अनुचित बताकर रद्द कर दिया था. कोर्ट ने इसे प्राकृतिक न्याय का सीधा उल्लंघन माना.
कोर्ट ने पाया कि जब कर्मचारी आरोपों का खंडन कर रहा हो,तो विभाग नियम19का मनमाना उपयोग करके औपचारिक जांच से बच नहीं सकता. विभाग ने मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट और संस्थान के स्टोर रजिस्टर (जिससे साबित हुआ कि वहां कोई गैस कटर उपलब्ध ही नहीं था) जैसे ठोस सबूतों को नजरअंदाज कर दिया.
हाईकोर्ट ने8मार्च2019के चार्ज मेमो, 11नवंबर, 2019के सजा के आदेश और6सितंबर2021के अपील खारिज करने के आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है. कोर्ट ने राज्य सरकार और श्रम संसाधन विभाग को आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता के रोके गए सभी वित्तीय व सेवा लाभ,वेतन वृद्धि के बकाए के साथ3महीने के भीतर जारी किए जाएं.
पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट--