BIHAR NEWS : पैड वाली मुखिया नाम से मशहूर भोजपुर की महिला की कहानी जानने के लिए पढ़िये यह खबर
पटना : महिला सशक्तिकरण की मिसाल कायम कर रही भोजपुर की पैड वाली मुखिया ने देश-विदेश में बिहारियों को गर्व होने पर मौका प्रदान किया है. महज 23 रुपये में संगिनी ब्रांड नामक स्वदेशी पैड का उत्पादन करके गांव समेत सभी महिलाओं के जीवन में महत्वपूर्ण योगदान देने का काम कर रही है.
कोरोना काल में जब देश-दुनिया में लॉकडाउन के कारण लाखों लोगों का रोजगार छिन गया था, तब भोजपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड अंतर्गत दांवा पंचायत की मुखिया सुशुमलता कुशवाहा ने महिलाओं के लिए एक अनूठी पहल की. उन्होंने पंचायत स्तर पर ही सेनेटरी पैड बनाने की सेमी-ऑटोमेटिक मशीन लगवाई और 'संगिनी' ब्रांड के नाम से सस्ते व गुणवत्तापूर्ण पैड का उत्पादन शुरू किया. इस पहल से पंचायत की 10 से अधिक महिलाओं को घर के पास ही रोजगार मिल गया है. मुखिया सुशुमलता ने मास्टर इन सोशल वर्क(एमएसडब्ल्यू) किया है. वो बताती हैं कि 2012 में शादी के बाद 2016 में वे दांवा पंचायत की मुखिया बनीं. एक बैठक के दौरान महिलाओं की स्वच्छता और सेनेटरी पैड की समस्या पर चर्चा हुई, तो उन्होंने तत्काल इस दिशा में कदम उठाया.
10 लाख के फंड से लगायी मशीन*
मुखिया सुशुमलता ने बताया कि तत्कालीन जिलाधिकारी के सहयोग और सरकारी योजना के तहत मिले 10 लाख रुपये के फंड से मशीन लगाकर पैड का उत्पादन शुरू किया. कुछ अतिरिक्त राशि जोड़कर पूरा प्लांट तैयार हुआ. यह मशीन सेमी-ऑटोमेटिक है, जिसमें जीविका दीदियां ही सारा काम संभालती हैं. कच्चा माल डालने से लेकर कटिंग, फोल्डिंग, पैकिंग और बिक्री तक का पूरा काम बेहतर तरीके से करती हैं. एक दिन में 8 घंटे की शिफ्ट में करीब 4,500 पैड तैयार हो जाते हैं. ये पैड अल्ट्रा-थिन, एक्स्ट्रा लार्ज और 100 मिलीलीटर क्षमता वाले हैं, जो बाजार के सामान्य पैड की तुलना में काफी सस्ते हैं. मात्र 23 रुपये में 6 पैड का एक पैकेट उपलब्ध है, जिसे जीविका दीदियां आसपास के गांवों और पंचायतों में बेच रही हैं. इस मुहिम की शुरुआत में ग्रामीण इलाकों में महिलाओं और लड़कियों के बीच काफी हिचकिचाहट थी. कई घरों में पुरानी परंपरा के अनुसार कपड़े का इस्तेमाल होता था. इस समस्या को दूर करने के लिए मुखिया और जीविका दीदियों ने घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाया. मौजूदा समय में खासकर युवा लड़कियों के बीच धीरे-धीरे स्वीकार्यता बढ़ रही है. आज भी कुछ हिचक बाकी है, लेकिन इसे जड़ से खत्म करने की कोशिश जारी है. मुखिया का कहना है कि आने वाले दिनों में इस उत्पाद को अन्य जिलों तक पहुंचाने और सरकारी आवासीय बालिका छात्रावासों में सप्लाई करने की योजना है. यह पहल न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर स्वच्छता और मासिक धर्म स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी फैला रही है.