BIHAR NEWS : राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण-SPDRR के माध्यम से बिहार में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को सुदृढ़ करने की दिशा में नई पहल

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पटना : बिहार राज्य में आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction – DRR) को अधिक प्रभावी और समन्वित बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सभागार में राज्य में सभी स्तरों पर कार्यरत एजेंसियों/संस्थाओं के साथ एक समन्वय बैठक आयोजित की गई. यह बैठक प्राधिकरण के तत्वावधान में यूनिसेफ, GPSVS तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के लगभग 30 सदस्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने बैठक में सक्रिय भागीदारी के सहयोग से आयोजित हुई, जिसमें विभिन्न सरकारी विभागों, गैर-सरकारी संस्थाओं तथा आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में कार्यरत हितधारकों ने सहभागिता की. बैठक की अध्यक्षता प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. उदयकांत ने की.

बैठक में प्राधिकरण के सदस्य पी.एन. राय, कौशल किशोर मिश्र, नरेंद्र कुमार सिंह एवं शंभू दत्त झा ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार और मार्गदर्शन साझा किए.

उपाध्यक्ष डॉ. उदयकांत ने आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ बनाने तथा रोडमैप क्रियान्वयन सपोर्ट यूनिट (RISU) को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया. इस दिशा में सभी संस्थाओं ने सहयोग की प्रतिबद्धता व्यक्त की और यह सहमति बनी कि RISU के समन्वयन की जिम्मेदारी बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा निभाई जाएगी. रोडमैप क्रियान्वयन सपोर्ट यूनिट के अंतर्गत आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए राज्य स्तर पर एक साझा मंच स्टेट प्लेटफॉर्म फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (SPDRR) को क्रियान्वयन एवं सुदृढ़ीकरण किया जाएगा, जिसके माध्यम से सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य सभी हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा.

बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय इस प्रकार हैं :

1. आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए राज्य स्तरीय साझा मंच SPDRR को सक्रिय किया जाएगा, जिसमें विभिन्न विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों और अन्य हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित होगी.

2. एक समन्वय समिति गठित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता प्राधिकरण के उपाध्यक्ष या उनके द्वारा नामित सदस्य करेंगे तथा इसमें संबंधित विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे.

3. अगलगी, लू, वज्रपात, बाढ़, स्वास्थ्य, जल संसाधन, जलवायु परिवर्तन तथा आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर विशेषज्ञ समूह (Specialized Groups) गठित किए जाएंगे.

4. जिला एवं प्रखंड स्तर पर भी ऐसे मंच विकसित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय संस्थाओं और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की सहभागिता बढ़ सके.

5. प्रत्येक माह समन्वय बैठकों का आयोजन प्रमंडलों/जिलों/ प्रखण्डों के स्तर पर किया जाएगा जिसमें प्राधिकरण स्तर के वरीय पदाधिकारी भी शामिल होंगे.

6. आपदा प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा विश्लेषण और रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया.

7. सभी संस्थाओं से जनहित से जुड़े ठोस प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएंगे, जिनके आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी.

8. पारंपरिक एवं स्थानीय ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों आप के साथ समन्वय करते हुए सुनियोजित रूप से आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन हेतु उपयोग किया जाएगा जिसके फलस्वरूप उभरते जोखिमों के व्यवहारिक समाधान विकसित किए जा सकेंगे.

सदस्य पी.एन. राय ने कहा कि गैर-सरकारी संगठनों की सबसे बड़ी ताकत समुदाय के साथ उनकी गहरी पहुँच और विश्वास है. यदि इस क्षमता का समन्वित रूप से उपयोग किया जाए, तो आपदा जोखिम न्यूनीकरण के प्रयास समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुँचाए जा सकते हैं.

बैठक के अंत में यह भी स्पष्ट किया गया कि संसाधनों की कमी इस कार्य में बाधा नहीं है. राज्य और केंद्र सरकार दोनों ही आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता दे रहे हैं और इसके लिए पर्याप्त वित्तीय सहयोग उपलब्ध है. आवश्यकता ऐसे ठोस, व्यावहारिक और दूरदर्शी प्रस्तावों की है जो व्यापक जनहित को ध्यान में रखकर तैयार किए जाएँ.