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BIHAR NEWS : पशुपालकों तक समय पर गुणवत्तापूर्ण पशु चिकित्सा सेवा पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता - नन्दकिशोर राम

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पटना: डेयरी,मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अंतर्गत संचालित मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई सेवा यानी चलंत पशु अस्पताल ने बुधवार को सफलतापूर्वक अपनी सेवा के दो वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर विकास भवन स्थित विभागीय सभागार में पशुपालन निदेशालय द्वारा विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नन्दकिशोर राम द्वारा "पशुपालकों के द्वार पर पशु चिकित्सा सेवाएं - चलंत पशु अस्पताल के लिए मानक संचालन प्रक्रिया" और "बिहार पशु प्रजनन विनियमन अधिनियम, 2025" पर तैयार पुस्तिका का विमोचन किया गया। इसके साथ ही राज्य की ब्रीडिंग पॉलिसी के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए विकसित वेबसाइट का भी लोकार्पण किया गया।

इस मौके पर मंत्री नन्दकिशोर राम ने कहा कि मोबाइल पशु चिकित्सा इकाईयों ने पशु स्वास्थ्य सेवाओं को सीधे पशुपालकों के द्वार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के पशुपालकों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ पशुधन ही पशुपालकों की आय, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और राज्य की समृद्धि का मजबूत आधार है। सरकार पशु चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और पशुपालक-केंद्रित बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि आज मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई सेवा के दो वर्ष पूरे हो रहे हैं। बिहार आगे बढ़ रहा है और विषम परिस्थितियों में भी हमारा विभाग तत्पर है। बाढ़ आपदा के दौरान हमारे सभी पदाधिकारी पशुओं के चारे का प्रबंध कर रहे हैं, जो सराहनीय है। यह सेवा निरंतर जारी रहेगी।

वहीं, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि मोबाइल वेटरनरी यूनिट पशु सेवाओं के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहल है। आज हम इसका एसओपी जारी कर रहे हैं, जिससे एमवीयू के संचालन की मानक प्रक्रिया तय होगी।

उन्होंने कहा कि बिहार पशु प्रजनन विनियमन अधिनियम, 2025 को हमने अंगीकृत कर लिया है। इसके तहत पशु प्रजनन के क्षेत्र में कार्यरत सभी संस्थागत और व्यक्तिगत सेवा प्रदाताओं का पंजीकरण अनिवार्य होगा। अब सिर्फ कृत्रिम गर्भाधान कर देना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि विभागीय मानकों का अनुपालन और पशुपालकों के हितों की सुरक्षा की भी मॉनिटरिंग की जाएगी। मेरी सभी वेटरनरी डॉक्टरों और ब्रीडिंग से जुड़े लोगों से अपील है कि वे ब्रीडिंग पॉलिसी के तहत अपना पंजीकरण अवश्य करा लें।

वहीं इस कार्यक्रम में पशुपालन निदेशक श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि पशु प्रजनन विनियमन अधिनियम, 2025 के आने के बाद पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान से जुड़े सभी घटकों पर नियंत्रण हुआ है और इससे जुड़े संस्थानों और व्यक्तियों के पंजीकरण के लिए वेबसाइट के लोकार्पण से उन्हें सुविधा होगी।