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पशु बीमार है? टोल-फ्री नंबर 1962 पर करें कॉल, घर पहुंच कर इलाज करेगा डॉक्टर!

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MADAN KISHORE JHAलेखक

पटना : बिहार सरकार राज्य के पशुपालकों को हाईटेक बनाने का प्रयास कर रही है. तकनीक को सेवाओं से जोड़कर पशुपालन को आसान और लाभकारी बनाया जा रहा है. इसी कड़ी में राज्य सरकार का बिहार पशुपालक ऐप पशुपालकों को तेज,प्रभावी और घर बैठे सेवाएं दे रहा है.

डॉक्टर,दवा,एंबुलेंस-सब एक ऐप में!

पशुपालकों के लिए टोल-फ्री नंबर 1962,वीडियो कॉल,ट्रैक एंबुलेंस,रोगी का विवरण नजदीकी अस्पताल की जानकारी इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है. यह ऐप पशुपालकों की विभिन्न आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है,ताकि वे आसानी से सरकारी योजनाओं,पशु चिकित्सा सेवाओं और अन्य जानकारियों तक पहुंच सकें. ऐप के जरिए पशुपालक टोल-फ्री नंबर 1962 से जुड़कर या सीधे ऐप के माध्यम से मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों की मदद ले सकते हैं.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा लॉन्च किए गए इस ऐप और संबंधित सेवाओं के तहत अब वेटरनरी डॉक्टर घर-घर जाकर पशुओं का इलाज कर रहे हैं,जिसमें दवाइयां भी नि:शुल्क उपलब्ध है. बिहार में पशुपालन अब इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से और भी मजबूत बन रहा है. डेयरी,मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग पशुपालकों को इसे डाउनलोड करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है.

जानें,इसे कैसे करें डाउनलोड

गूगल प्ले स्टोर पर "बिहार पशुपालक ऐप" सर्च करके इसे आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है. अपना नाम और मोबाइल नंबर दर्ज कर पशुपालक घर बैठे ऐप के माध्यम से डेयरी,मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग से जुड़ी अनेक सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं. पशुपालन से जुड़ी विभिन्न योजनाओं,सब्सिडी और लाभों का विवरण,पशुओं की बीमारी,टीकाकरण,प्रजनन संबंधी सलाह और अन्य जानकारियां सहित डोर-टू-डोर पशु चिकित्सा सेवाएं यहां उपलब्ध हैं. 534 से अधिक मोबाइल पशु चिकित्सा यूनिट द्वारा पशुपालकों को उनके घर पर भी चिकित्सा सुविधा मिल रही है.

बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पशुपालकों को सशक्त बनाने की दिशा में यह ऐप प्रभावी तरीके से काम कर रहा है. पशुपालन इससे आसान और मुनाफे का कार्य बन रहा है,जिससे किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ रही है.

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