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BIHAR NEWS : पटना में चल रहा ऐसा कार्यक्रम, जो एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए बन सकता गेमचेंजर

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पटना: महिला एवं बाल विकास निगम (WCDC),बिहार सरकार ने एसिड अटैक से प्रभावित महिलाओं एवं बच्चों के पुनर्वास और सशक्तिकरण के उद्देश्य से दिल्ली स्थित छांव फाउंडेशन के सहयोग से एक व्यापक एवं संरचित पहल की शुरुआत की है. छांव फाउंडेशन एक गैर-लाभकारी संगठन है,जिसकी स्थापना वर्ष 2014 में हुई थी और जो पूरे भारत में एसिड अटैक सर्वाइवर्स के पुनर्वास एवं पुनर्समावेशन के लिए कार्यरत है. यह संस्था रेस्क्यू हस्तक्षेप,चिकित्सा सहायता,विधिक सहायता,मनोवैज्ञानिक परामर्श,शिक्षा,कौशल विकास तथा‘शीरोज़ हैंगआउट कैफ़े’के माध्यम से स्थायी आजीविका जैसे समग्र समर्थन मॉडल पर कार्य करती है. यह साझेदारी राज्य में सर्वाइवर्स के लिए संस्थागत सहायता तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

इस कार्यक्रम के अंतर्गत बिहार में लगभग 160 एसिड अटैक सर्वाइवर्स को चिकित्सा उपचार,मनोसामाजिक परामर्श,शिक्षा,कौशल विकास तथा स्थायी आजीविका के अवसरों सहित आवश्यक सेवाओं से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. यह पहल सर्वाइवर्स द्वारा झेली जा रही बहुआयामी चुनौतियों का समाधान करने तथा उनके समग्र पुनर्वास और सामाजिक पुनर्समावेशन को सुनिश्चित करने के लिए तैयार की गई है.

इस पहल के तहत 15 अप्रैल से 5 मई,2026 तक पटना स्थित यूथ हॉस्टल में 20 दिवसीय विशेष कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है. चाँव फाउंडेशन की एक समर्पित बहु-विषयक टीम सर्वाइवर्स के साथ व्यक्तिगत रूप से संवाद कर उनकी मनोवैज्ञानिक,शारीरिक,आर्थिक और सामाजिक आवश्यकताओं का व्यापक आकलन कर रही है. इन प्रक्रियाओं के साथ-साथ संरचित काउंसलिंग सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं,जिनका उद्देश्य भावनात्मक पुनर्वास और आत्मबल को सुदृढ़ करना है.

इन आकलनों के आधार पर प्रत्येक सर्वाइवर के लिए व्यक्तिगत पुनर्वास एवं सहायता योजनाएं तैयार की जा रही हैं,ताकि हस्तक्षेप उनकी विशिष्ट परिस्थितियों और दीर्घकालिक लक्ष्यों के अनुरूप हो. कार्यक्रम में क्षमता निर्माण और कौशल उन्नयन पर भी विशेष बल दिया जा रहा है,जिससे सर्वाइवर्स आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें और सम्मानजनक आजीविका प्राप्त कर सकें.

महिला एवं बाल विकास निगम,बिहार,छांव फाउंडेशन के साथ मिलकर इस पहल को सतत,समावेशी और परिणामोन्मुखी ढंग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है. यह साझेदारी एक सशक्त एवं संवेदनशील समर्थन प्रणाली विकसित करने का प्रयास है,जो न केवल तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा करे,बल्कि सर्वाइवर्स के दीर्घकालिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के मार्ग भी प्रशस्त करे.

*कार्यक्रम के प्रमुख घटक:*

* व्यापक परामर्श एवं विस्तृत आवश्यकता आकलन

* चिकित्सा सहायता एवं उपचार की सुविधा

* औपचारिक एवं अनौपचारिक शिक्षा तक पहुंच

* कौशल विकास एवं रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण

* स्थायी आजीविका एवं आय-सृजन के अवसरों का सृजन

*इस संबंध में प्रबंध निदेशक,महिला एवं बाल विकास निगम,श्रीमती बंदना प्रेयषी ने कहा कि*

“एसिड अटैक पीड़ित/सर्वाइवर प्रायः समाज के उन वर्गों से आते हैं जहाँ उन्हें सामाजिक,आर्थिक एवं मनोवैज्ञानिक चुनौतियों का गंभीर रूप से सामना करना पड़ता है. राज्य सरकार का उद्देश्य इन्हें पुनः गरिमापूर्ण जीवन की मुख्यधारा से जोड़ना है. इसके लिए समग्र एवं समन्वित दृष्टिकोण अपनाते हुए विधिक सहायता,गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपचार,मनोसामाजिक परामर्श तथा प्रभावी पुनर्वास की व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जा रही हैं,ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज में सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें.”

यह पहल बिहार में सर्वाइवर पुनर्वास के क्षेत्र में एक मानक स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है तथा अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श मॉडल बन सकती है. राज्य सरकार और छनव फाउंडेशन के संयुक्त प्रयासों से एसिड अटैक सर्वाइवर्स के जीवन में सार्थक,मापनीय और सकारात्मक परिवर्तन आने की उम्मीद है,जिससे वे गरिमा और आत्मविश्वास के साथ समाज की मुख्यधारा में पुनः स्थापित हो सके.

पटना से अंकिता की रिपोर्ट--