बिहार MLC चुनाव : NDA में सीटों पर लगभग बनी सहमति,चिराग और कुशवाहा को मौका,मांझी को झटका
BIHAR NEWS:बिहार विधान परिषद (MLC) की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव और उपचुनाव को लेकर एनडीए में सीट बंटवारे की तस्वीर अब लगभग साफ होती दिख रही है. सत्तारूढ़ गठबंधन के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल होने के कारण 10 में से 9 सीटों पर उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है. इसी को देखते हुए भाजपा और जदयू ने सहयोगी दलों को भी प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर काम तेज कर दिया है.
बीजेपी और जेडीयू के बीच सीटों का बंटवारा तय
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी और जेडीयू के बीच सीटों का प्रारंभिक बंटवारा तय हो चुका है. दोनों दल अपने-अपने हिस्से की सीटों पर उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं. वहीं, एनडीए के सहयोगी दलों में चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को एक-एक सीट दिए जाने की संभावना जताई जा रही है. इससे दोनों नेताओं की राजनीतिक स्थिति गठबंधन में और मजबूत होती दिख रही है.
मौजूदा समीकरणों में हम पार्टी के लिए जगह नहीं
दूसरी ओर, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी की पार्टी को इस बार विधान परिषद चुनाव में सीट नहीं मिलने की चर्चा तेज है. हालांकि, मांझी पहले ही सार्वजनिक रूप से एनडीए से कम से कम एक सीट की मांग कर चुके हैं, लेकिन मौजूदा समीकरणों में उनकी पार्टी को जगह मिलती नहीं दिख रही है. इससे एनडीए के अंदर राजनीतिक हलचल भी बढ़ गई है.
राजनीतिक दल उम्मीदवारों के चयन को लेकर लगातार कर रहे बैठक
विधान परिषद की जिन सीटों पर चुनाव होना है,उनमें कई महत्वपूर्ण रिक्तियां शामिल हैं. नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और राजनीतिक दल उम्मीदवारों के चयन को लेकर लगातार बैठकें कर रहे हैं. बीजेपी अपने उम्मीदवारों के नामों पर दिल्ली में मंथन कर रही है, जबकि जेडीयू भी अपनी सूची को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है. जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों के चयन पर विशेष फोकस किया जा रहा है.
बिहार की राजनीति में नई चर्चा की संभावना
विधानसभा में एनडीए के पास 200 से अधिक विधायकों का समर्थन है, जिसके कारण उसके उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है. यही वजह है कि गठबंधन के भीतर सीटों का बंटवारा राजनीतिक संतुलन और सहयोगी दलों को साधने के नजरिए से किया जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आगामी चुनावी रणनीति और सामाजिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है. अब सबकी निगाहें बीजेपी और जेडीयू की अंतिम उम्मीदवार सूची पर टिकी हैं, जिसके सामने आते ही बिहार की राजनीति में नई चर्चा शुरू होने की संभावना है.