बिहार की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान : कला एवं संस्कृति विभाग की प्रथम त्रैमासिक पत्रिका का विमोचन
पटना: बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा,ऐतिहासिक धरोहर और विभागीय गतिविधियों को व्यापक स्तर पर जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से कला एवं संस्कृति विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है. आज विभाग की प्रथम त्रैमासिक पत्रिका का विधिवत विमोचन किया गया.
विभाग के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने पत्रिका का लोकार्पण करते हुए इसे कला और संस्कृति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया. उन्होंने कहा कि बिहार की पहचान उसकी गौरवशाली विरासत,लोक परंपराओं,शास्त्रीय कलाओं और साहित्यिक धरोहर से है. यह पत्रिका न केवल विभागीय गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत करेगी,बल्कि राज्य की विविध सांस्कृतिक धारा को भी एक मंच प्रदान करेगी.
मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार कला और संस्कृति के संरक्षण,संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिबद्ध है. यह पत्रिका कलाकारों,शोधकर्ताओं,विद्यार्थियों और कला प्रेमियों के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री साबित होगी. साथ ही विभाग की योजनाओं,कार्यक्रमों और उपलब्धियों की जानकारी भी नियमित रूप से इसमें प्रकाशित की जाएगी.
इस अवसर पर विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने कहा कि पत्रिका का उद्देश्य पारंपरिक और समकालीन कला रूपों के बीच संवाद स्थापित करना है. उन्होंने बताया कि भविष्य में इसे और समृद्ध सामग्री के साथ नियमित रूप से प्रकाशित किया जाएगा.
सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की निदेशक रूबी कुमारी ने कहा कि यह प्रकाशन बिहार के कलाकारों को अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता प्रदर्शित करने का अवसर देगा. पत्रिका में लोकनृत्य,लोकसंगीत,नाटक,चित्रकला,मूर्तिकला,साहित्य और सांस्कृतिक आयोजनों से संबंधित लेख,साक्षात्कार और विशेष आलेख शामिल किए गए हैं.
कार्यक्रम के दौरान कई वरिष्ठ विभागीय अधिकारी और कला क्षेत्र से जुड़े गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे. इस पहल को बिहार की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
पटना से अंकिता की रिपोर्ट--