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बिहार कैबिनेट विस्तार पर हलचल : क्षेत्रीय-सामाजिक संतुलन साधने में जुटी NDA,नए चेहरों को मिल सकता मौका

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पटना:सम्राट चौधरीके नेतृत्व वाली बिहार सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. माना जा रहा है कि इस विस्तार में क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण को संतुलित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा. NDA के सहयोगी दलों के बीच सीटों और प्रतिनिधित्व को लेकर मंथन जारी है.

बीजेपी कोटे से नए नामों पर चर्चाएं तेज

सूत्रों के अनुसार, बीजेपी अपने कोटे में पुराने चेहरों को बरकरार रखते हुए कुछ नए नामों को भी मौका दे सकती है. खास तौर पर मगध और तिरहुत क्षेत्रों पर फोकस किया जा रहा है. इन इलाकों में पहले से अति पिछड़ा वर्ग को प्रतिनिधित्व मिला हुआ है, इसलिए अब सवर्ण वर्ग से विधायकों को मंत्री बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है. दरभंगा क्षेत्र से ब्राह्मण समुदाय के किसी विधायक को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है.

युवा चेहरों को मौका देने की तैयारी में सरकार

वहीं, नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू अपने कुछ अनुभवी नेताओं को बनाए रखते हुए नए और युवा चेहरों को मौका देने की तैयारी में है. खास तौर पर ऐसे विधायकों पर विचार हो रहा है जो पहली बार जीतकर आए हैं और जिनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि मजबूत है. इससे सरकार युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संदेश देना चाहती है.

जीतन राम के बेटे संतोष मांझी का नाममंत्रिमंडल में तय

दूसरी ओर, NDA के अन्य घटक दलों—लोजपा (रामविलास), रालोमो और हम—में बड़े बदलाव की संभावना कम बताई जा रही है. उपेंद्र कुश्वाहा के बेटे को फिर मंत्री बनाए जाने की चर्चा है, जबकि जीतन राम मांझी के बेटे संतोष मांझी का मंत्रिमंडल में शामिल होना लगभग तय माना जा रहा है.

राजनीतिक समीकरणों को साधने कीरणनीति पर जोर

कुल मिलाकर, यह मंत्रिमंडल विस्तार सिर्फ पदों का बंटवारा नहीं, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों को साधने की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. इसमें जातीय संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और युवा नेतृत्व—तीनों को साधने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है.