बागमती नदी उफान पर : मधुबन प्रताप गांव के पास बना चचरी पुल तेज बहाव में समाया
मुजफ्फरपुर:बागमती नदी एक बार फिर उफान पर है और इसका सबसे बड़ा खामियाजा भुगत रहे हैं औराई प्रखंड के हजारों ग्रामीण. दरअसल,जिले के मधुबन प्रताप गांव के पास बना चचरी पुल तेज बहाव में बह गया है. जिस पुल के सहारे लोग रोजाना अपने काम,पढ़ाई और इलाज के लिए निकलते थे,आज वही पुल बागमती की धार में समा गया है.
गांवों का संपर्क प्रखंड और जिला मुख्यालय से टूटा
ग्रामीण दीपु सहनी ने बताया कि पिछले कई दिनों से बागमती का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था. नदी की तेज होती धार और प्रशासनिक लापरवाही के बीच आखिरकार चचरी पुल ने जवाब दे दिया. देखते ही देखते लोगों की जीवनरेखा माने जाने वाला यह पुल पानी में बह गया और गांवों का संपर्क प्रखंड मुख्यालय व जिला मुख्यालय से लगभग टूट गया.
स्कूली बच्चों,मरीजों,रोज कमाने वालेमजदूरों की बढ़ी परेशानी
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर हर साल बाढ़ आती है, पुल बहता है, लोग परेशान होते हैं, फिर भी स्थायी समाधान क्यों नहीं निकलता? क्या ग्रामीणों की परेशानी सिर्फ चुनावी वादों तक ही सीमित है? पुल बहने के बाद अब लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ेगा. स्कूली बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी, मरीजों को अस्पताल पहुंचने में परेशानी होगी और रोज कमाने-खाने वाले मजदूरों की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाएंगी.
स्थायी पुल निर्माण की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं
गोताखोर मनोज सहनी का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ के समय यही हालात बनते हैं,लेकिन स्थायी पुल निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता. ग्रामीणों का आरोप है कि नेताओं के भाषणों में विकास दिखाई देता है, लेकिन जमीनी हकीकत में लोग आज भी चचरी पुल और नाव के भरोसे जिंदगी जीने को मजबूर हैं.
निचले इलाकों में बढ़ा बाढ़ का खतरा
फिलहाल बागमती का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और खतरा अभी टला नहीं है. अगर नदी का रौद्र रूप इसी तरह जारी रहा तो आसपास के निचले इलाकों में भी बाढ़ का पानी फैल सकता है. अब सबकी नजर प्रशासन पर है कि आखिर राहत और वैकल्पिक व्यवस्था कब तक उपलब्ध कराई जाती है, या फिर ग्रामीणों को एक बार फिर अपने हाल पर छोड़ दिया जाएगा।