“कांटों की सफाई” वाले बयान से गरमाई सियासत : इशारों-इशारों में विजय सिन्हा का बड़ा संदेश, कृषि विभाग में होगी सफाई
आम जनता मैंगो पिपल की जीवन गाथा में तमाम उतार चढ़ाव के बीच जो चीज अनवरत बनी रहती है वो है संघर्ष। आम जनता को ये संघर्ष सूट भी करता है। यही तो उनकी पहचान है, यही तो अंतर है, आम और खास में। लेकिन जब एक मंत्री संघर्ष की बात करें और मंच से साफ कहे कि विभाग कोई भी हो जनता की समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष जारी रहेगा, तो समझना चाहिए कि विजय के विजय में विघ्न है। समस्या विकराल है।
इतना कि विजय सिन्हा को विजय बिहारी बनना पड़ रहा है। बिहार की आम जनता के लिए, किसानों के लिए, विजय-पथ से कांटो को चुन चुन कर हटाते हुए हाथ लहूलुहान भी हो जाए तो परवाह नहीं। संघर्ष करेंगे, वो भी उस सिस्टम से जो पग पग पर रोड़ा अटकाने, रास्ता भटकाने और काम लटकाने को लेकर कुख्यात हो चुका है। विजय पथ को उनसे सुरक्षित करते हुए जनता के लिए सुगम्य, सुलभ, सहज बनाए रखना विजय सिन्हा के लिए भी सरल नहीं। एक बार पहले भी उन्होंने प्रयास किया, लेकिन बताते हैं कि परीक्षा की तैयारी के बाद प्रश्नपत्र ही बदल गया।
विभाग में कार्रवाई और कतिपय कारणों से विभाग बदलने को लेकर जो भी विवाद विजय सिन्हा से जुड़ा, वो अब पुरानी बात हो गई है लेकिन उन्होंने उसे यूं ही भूला दिया ऐसा भी नहीं। कुछ कसक होगी ही जो बात भुलाए नहीं भुलती, पर वहां रूकना भी मुनासिब नहीं। संघर्ष पथ के आगे ही विजय-पथ की शुरूआत होती है। विभाग भले बदल दिया गया पर अब किसानों के हक के लिए उसी सिस्टम से संघर्ष को विजय सिन्हा तैयार हैं।
बात इशारो में भले हुई पर इरादे साफ साफ झलक रहे। नए विभाग के नाते उन्हें बड़ा बाबू कुछ भी पढ़ा लिखा कर परीक्षा में बिठा दें, ऐसे विद्यार्थी वो नहीं, संघर्ष करेंगे, सीखेंगे, समझेंगे और फिर कांटो की सफाई भी करेंगे, शिकायतों पर कार्रवाई भी करेंगे पर जब जज्बा सिस्टम हिला देने वाला हो तो कंपन सरकार और समाज तक महसूस होना स्वभाविक है। ऐसे में फिर थोड़ा संदेह होता है कि कहीं परीक्षा में प्रश्न ही न बदल जाए। ऐसे में सवाल तो पूछेंगे कि ‘विजय-पथ’ में कौन रूकावट डाल रहा है?
पटना से दीपक शर्मा की स्पेशल रिपोर्ट