JHARKHAND NEWS : द्वितीय JPSC परीक्षा मामला: सीबीआई रिपोर्ट के दो साल बीते, कोर्ट में ट्रायल का इंतज़ार
झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी की परीक्षाओं में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। हाल ही में सीआईडी ने उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता को गिरफ्तार किया और आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांगते के आवास पर छापेमारी की। 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में भी अयोग्य अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हैं।लेकिन इन ताज़ा हलचलों के बीच, सबसे बड़ा सवाल उस बहुचर्चित द्वितीय जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पर है, जिसकी सीबीआई जांच रिपोर्ट अदालत में जमा हुए करीब दो साल बीत चुके हैं, लेकिन आज तक ट्रायल तक शुरू नहीं हो पाया है!आरोप है कि आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों और अधिकारियों ने अपने ही रिश्तेदारों और खास लोगों को फायदा पहुंचाया:
बोर्ड अध्यक्ष दिलीप कुमार प्रसाद और सदस्य गोपाल प्रसाद सिंह, शांति देवी व राधा गोविंद सिंह नागेश जैसे जिम्मेदारों पर अपने बेटों, बेटियों, भाइयों और भतीजों को सुनियोजित तरीके से नंबर दिलवाने के गंभीर आरोप हैं।ओएमआर शीट (OMR Sheet) पर सिर्फ 15, 20 या 30 गोले भरने वाले अयोग्य अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू में आसमान छूते नंबर दे दिए गए।यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व उपमुख्यमंत्री और तत्कालीन महाधिवक्ता के करीबियों, रिश्तेदारों और निजी सहायकों को भी जमकर रेवड़ियां बांटी गईं।वाराणसी और अन्य स्थानों से आए मूल्यांकनकर्ताओं और प्रोफेसरों ने भी पूछताछ में यह कबूल किया है कि उन्होंने बोर्ड के अधिकारियों के भारी दबाव में आकर कॉपियों में नंबर बढ़ाए थे।सवाल यह है कि जब सीबीआई की जांच पूरी हो चुकी है, सबूत अदालत के पास हैं, तो फिर पिछले 20 वर्षों से न्याय की आस लगाए बैठे मेधावी और योग्य अभ्यर्थियों का सब्र कब तक परखा जाएगा? क्या भ्रष्टाचार के इन नायकों को कभी सजा मिलेगी?