Hindi News / 30 वर्षो तक चला लाल आतंक का सिक्का,अब बना पर्यटक स्थल

गढ़वा में बुढ़ा पहाड़ पर बदलाव की लहर : 30 वर्षो तक चला लाल आतंक का सिक्का,अब बना पर्यटक स्थल

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गढ़वा:केंद्रीय गृह मंत्री ने 31 मार्च को देश से नक्सल मुक्त की एक योजना बनाई थी, जिसे 30 मार्च को लोकसभा में घोषणा कर दी है. गृह मंत्री के प्रयास की कोशिशगढ़वा जिले के बुढ़ा पहाड़ पर देखने लगी है. अब बदलाव की लहर दिख रही है. 30 वर्षो तक लाल आतंक का सिक्का चला, लेकिन नक्सल मुक्त होने पर इस क्षेत्र की दिशा और दशा दोनों बदल गई है. जहां एक समय यह पहाड़ भाकपा माओवादियों के चुंगल में था, वहीं आज यह बुढ़ा पहाड़ अब पर्यटक स्थल के रूप में विकसित होने जा रहा है.

बुढ़ा पहाड़ नक्सल मुक्त घोषित

केंद्र सरकार ने बुढ़ा पहाड़ को भी नक्सल मुक्त घोषित कर दिया है. बूढ़ा पहाड़ के तलहटी में बसे गांवों से माओवादियों का किला ढह गया है. ग्रामीणों के मन से पुलिस और नक्सली दोनों का डर खत्म हो गया है.सरकार के पैरलर माओवादी यहां से अपने संगठन का संचालन किया करते थे. यह पहाड़ नक्सलियों का ट्रेनिंग सेंटर हुआ करता था. यह पहाड़ छत्तीसगढ़, लातेहार और गढ़वा से घिरा हुआ पहाड़ है. जो पूरे 52 किलोमीटर में फैला हुआ है.

भाकपा माओवादियों का खत्म हुआ डर

बूढ़ा पहाड़ से सटे बूढ़ा गांव, कोरवाटोली, कोरवाडीह, बहेराटोली, तुरेर, तमुरा, खपरी महुआ, सरूवत, कुल्ही, हेसातू, चेमो और सनया जैसे कई गांव में किसी के आने की हिम्मत नहीं हुआ करती थी, चाहे आम हो या सुरक्षा के जवान. वर्ष 2018 के बुढ़ा पहाड़ के तलहटी के बहेराखांड मे भाकपा माओवादी ने यंहा लैंड माइंस विस्फोट किया था. जिसमें आधा दर्जन जवानों ने अपनी शहादत दी थी. इसके बाद पुलिस और सीआरपीएफ 172 बटालियन के जवानों ने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया और इस चुनौती को सुरक्षा जवानों ने इस कदर लिया कि बुढ़ा पहाड़ पर जहां कभी विस्फोट की आवाज सुनाई देती थी, अब इस इलाके में विकास की बयार बह रही है.

अब लोगों को सरकारी योजनाएं से जोड़ी जा रही

आज पहाड़ पर रह रहे विलुप्त प्राय आदिम जनजाति के लोगों को सरकारी योजनाएं से जोड़ी जा रही है. यहां बीएसएनएल का टावर लगाया गया, विद्यालय बनाया जा रहा है. जमीन से पहाड़ तक पानी पहुंचाया जा रहा है. ग्रामीणों ने कहा कि पहले यहां नक्सलियों का राज था, लेकिन आज लोग निर्भीक होकर घूम रहे हैं. सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे है.

गढ़वा डीसी-एसपी ने कहा कि गढ़वा का बुढ़ा पहाड़ हमेशा सुर्खियों में रहा है. यह नक्सल क्षेत्र रहा है, वहां पहुंचना ही बहुत कठिन है. आज से बीस वर्ष पहले जो स्थिति थी आज ठीक इसके विपरित है. ग्रामीणों को योजनाओं से जोड़ी जा रही है उस क्षेत्र से नक्सल अब खत्म हो गया है. कुछ सिमट कर रह गए है जिसे बहुत जल्द समाप्त कर दिया जाएगा.

अधिकारियों पर उठ रहे सवाल

स्थानीय विधायक ने कहा कि बूढ़ा पहाड़ पर विकास हो ये हम सभी चाहते हैं, लेकिन अधिकारी सिर्फ जाते हैं फोटो खिचवा कर आ जाते हैं. उन्होंने कहा कि गृह मंत्री के टास्क को गढ़वा में बैठे अधिकारियों ने नहीं किया है.