फरक्का संधि पर बिहार के हितों की अनदेखी का आरोप : डिप्टी सीएम विजय चौधरी बोले- लीन पीरियड में 1500 क्यूमेक पानी छोड़ने की बाध्यता खत्म हो
पटना: उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने फरक्का जल संधि को लेकर बिहार के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि लीन पीरियड में बिहार से 1500 क्यूमेक पानी छोड़ने की बाध्यता समाप्त होनी चाहिए. इस पानी का इस्तेमाल राज्य में औद्योगिक विकास,पेयजल और सिंचाई जैसी आवश्यक जरूरतों के लिए किया जा सकता है.
मंगलवार को जदयू प्रदेश कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के बाद विजय कुमार चौधरी और मंत्री शीला मंडल ने आमजनों की समस्याएं सुनीं. इसके बाद उपमुख्यमंत्री ने प्रेसवार्ता में फरक्का जल संधि से जुड़े मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखा.
उन्होंने कहा कि जदयू की ओर से गंगा बेसिन के जिलों में‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’कार्यक्रम चलाया जा रहा है. राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा विभिन्न जिलों में लोगों से संवाद कर रहे हैं. चौधरी के अनुसार,मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने केंद्र सरकार के मंत्रियों के समक्ष भी बिहार के जल हितों का मुद्दा उठाया है.
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि फरक्का बैराज के कारण गंगा में सिल्ट जमा होने से नदी उथली हुई है और प्राकृतिक जलधारा प्रभावित हुई है. इसका असर गंगा बेसिन के इलाकों में बाढ़ और कटाव के रूप में दिखाई दे रहा है. उन्होंने भागलपुर के खरीक में हालिया कटाव का भी उल्लेख किया.
चौधरी ने कहा कि बिहार की सहायक नदियों से गंगा में बड़ी मात्रा में पानी पहुंचता है,इसलिए राज्य के जल हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. उन्होंने बताया कि बिहार की पहल पर केंद्र सरकार ने नेशनल सिल्ट मैनेजमेंट पॉलिसी का फ्रेमवर्क तैयार किया है.
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट--