Hindi News / रांची के सरकारी गोदाम में मजदूरी के एवज में अनाज देने का खुलासा

गरीबों के निवाले पर डाका : रांची के सरकारी गोदाम में मजदूरी के एवज में अनाज देने का खुलासा

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Disclosure of giving grains in lieu of wages in Ranchi government warehouse

रांची:झारखंड के खाद्य आपूर्ति विभाग में अंधेर नगरी चौपट राजा वाली लाइन फिट बैठ रही है. रांची के कडरू स्थित JSFC गोदाम से चौंकाने वाला मामला सामने आया है. आरोप है कि JSFC गोदाम में मजदूरी के एवज में अनाज दिया जा रहा है. जबकि, यह अनाज गरीबों का निवाला है, लेकिन अधिकारियों की बेरुखी और ठेकेदार की मनमानी की वजह से मजदूरों को मेहनताना के एवज में अनाज देकर चुप करा दिया जा रहा है. यह मामला तब उजागर हुआ जब गोदाम से अनाज लेकर निकल रही महिलाओं से पूछताछ की गई.

गोदाम में चल रहे अधिकारियों के मनमानी के खेल

दरअसल, कडरू गोदाम में काम कर रही महिला मजदूर को अनाज मिलने पर जब उनसे पूछा गया तो महिला ने जो जवाव दिया वो सुनकर आप हैरान रह जाएंगे. महिला मजदूर वीडियो में साफ कहते दिखाई दे रही कि यह अनाज उनको मजदूरी के एवज में मिला है सबसे बड़ी बात यह है कि यह पूरा मामला गोदाम के मुख्य गेट पर सामने आया, जिससे सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.

महिला मजदूरों का दावा,मजदूरी के बदले मिला अनाज

गोदाम से बाहर निकल रही महिला मजदूरों से जब पूछा गया कि उनके पास मौजूद अनाज कहां से आया, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह उन्हें काम के बदले दिया गया है. महिलाओं के इस बयान के बाद विभागीय कार्यशैली और ठेकेदारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

मामले को लेकर मजदूर मटिया संघ के केंद्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सोनी ने बड़ा आरोप लगाया है. उनका कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। जब से गोदाम की जिम्मेदारी विभाग और डोर टू डोर स्टेप डिलिवरी से जुड़े ठेकेदारों को सौंपी गई है, तब से इस तरह की गड़बड़ियां लगातार हो रही है. उन्होंने आरोप लगाया है कि मजदूरों को नकद भुगतान की जगह अनाज देकर काम कराया जाता है और इसकी शिकायत कई बार विभाग के वरीय अधिकारियों और मंत्री तक की गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.

विभाग और ठेकेदारों पर मिलीभगत का आरोप

मजदूर संघ का आरोप है कि गोदाम संचालन में विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से गरीबों के हिस्से का अनाज गलत तरीके से बाहर जा रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर सरकारी गोदाम से अनाज बाहर कैसे निकल रहा है और इसकी निगरानी कौन कर रहा है.

आखिर जिम्मेदार कोन?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि गरीबों के लिए निर्धारित सरकारी अनाज को मजदूरी के भुगतान के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? गोदाम प्रबंधन, विभागीय अधिकारी या फिर ठेकेदार, आखिर जवाबदेह कौन है? इसके साथ ही यह भी देखने वाली बात होगी कि इस पूरे मामले में विभाग कोई जांच करता है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा.

रांची से संवाददाता राहुल कुमार की रिपोर्ट