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बोधगया में धर्म संस्कृति संगम कार्यक्रम : राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने कहा— बिहार सभी धर्मों और संस्कृतियों का संगम

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बोधगया: बिहार केबोधगया स्थित मगध विश्वविद्यालय में शुक्रवार को आयोजित धर्म संस्कृति संगम कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. इंद्रेश कुमार ने सर्वधर्म समभाव,भाईचारा और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया.

डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि धर्म संस्कृति संगम कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय लोकतंत्र में सर्वधर्म समभाव की भूमिका और चुनौतियों पर चर्चा करना है. उन्होंने कहा कि धर्मों के बीच संघर्ष नहीं होना चाहिए,क्योंकि भारत में सभी लोग एक ही संस्कृति और मानवता की संतान हैं. बोधगया,जो भगवान विष्णु और ज्ञान की धरती मानी जाती है,वहां से पूरे विश्व को शांति और एकता का संदेश दिया जाना चाहिए.

अपने संबोधन में राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने कहा कि जब उन्हें बिहार का राज्यपाल बनाए जाने की जानकारी मिली,तब उन्हें बेहद खुशी हुई,क्योंकि बिहार ऐसा राज्य है जहां सभी संस्कृतियां और धर्म एक साथ मिलकर रहते हैं. उन्होंने कहा कि तीन दिन पहले डॉ. इंद्रेश कुमार ने उन्हें इस कार्यक्रम की जानकारी दी थी और उन्होंने अपने अन्य कार्यक्रमों में बदलाव कर इस ऐतिहासिक धरती पर आने का निर्णय लिया.

राज्यपाल ने कहा कि धर्म संस्कृति संगम जैसे कार्यक्रम पूरे देश में अभियान के रूप में चलाए जाने चाहिए,ताकि सभी धर्मों के बीच एकता और मेल-मिलाप बढ़े. उन्होंने कहा कि बिहार से एकता और भाईचारे का संदेश पूरे विश्व तक पहुंचना चाहिए.

अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए राज्यपाल ने कहा, “मेरा जन्म मुस्लिम परिवार में हुआ,मैं ईसाई माहौल में बड़ा हुआ,सेना में जाकर हिंदू धर्म से जुड़ा और मेरे मित्र सिख एवं बौद्ध धर्म से जुड़े रहे. हर धर्म से मेरा गहरा लगाव है.”उन्होंने स्वयं को भगवान विष्णु का भक्त बताते हुए कहा कि भारतीय सेना देश की सबसे धार्मिक और अनुशासित संस्था है और उन्हें उसका हिस्सा होने पर गर्व है.

उन्होंने बताया कि सेना में सेवा के दौरान वह हर वर्ष बद्रीनाथ मंदिर जाते थे,वहां घंटी चढ़ाते थे और उसकी रिकॉर्डिंग अपने जवानों को भेजते थे. जवान उस घंटी की आवाज को शुभ मानते थे और विश्वास करते थे कि आने वाला वर्ष सुरक्षित और बेहतर रहेगा.

राज्यपाल ने यह भी कहा कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सेवा के दौरान कई बार अमरनाथ मंदिर की यात्रा की. उन्होंने बताया कि वर्ष 1995 की अमरनाथ आपदा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौत हुई थी,जिसके बाद यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए सेना और प्रशासन ने कई प्रयास किए,जिसमें उनका भी योगदान रहा.

उन्होंने कहा कि बिहार में आकर उन्हें ऐसा महसूस होता है कि यह धरती एकता और सद्भाव का संदेश देने के लिए उन्हें यहां लाई है. उन्होंने डॉ. इंद्रेश कुमार के विचारों की सराहना करते हुए कहा कि बिहार की आवाज और सोच इतनी मजबूत होनी चाहिए कि उसका संदेश बांग्लादेश की राजधानी ढाका तक और उससे भी आगे पहुंचे.

बोधगया से मनोज सिंह की रिपोर्ट