बिहार विश्वविद्यालयों में बड़ा बदलाव : अब परफॉर्मेंस आधारित ग्रेडिंग, रिसर्च-इनोवेशन पर जोर, डिजिटल सिस्टम अनिवार्य, लापरवाही पर सख्त कार्रवाई
पटना: बिहार के विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है. राज्यपाल एवं कुलाधिपतिSyed Ata Hasnainने नई गाइडलाइन जारी करते हुए प्रदर्शन आधारित ग्रेडिंग प्रणाली लागू करने का निर्देश दिया है. इस नई व्यवस्था के तहत अब विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन केवल पारंपरिक मानकों पर नहीं,बल्कि उनके समग्र प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा.
नई नीति में विशेष रूप से रिसर्च,इनोवेशन,पेटेंट,प्रोजेक्ट्स,टीचिंग-लर्निंग प्रोसेस,परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक सुधार को प्रमुखता दी गई है. राज्यपाल ने स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालयों को अब अधिक पारदर्शी,जवाबदेह और परिणाम-उन्मुख प्रणाली अपनानी होगी. इसके तहत सभी विश्वविद्यालयों में डिजिटल सिस्टम लागू करना अनिवार्य किया गया है,जिससे शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता आए.
गाइडलाइन के अनुसार,सभी विश्वविद्यालयों को समयबद्ध अकादमिक कैलेंडर लागू करना होगा. परीक्षाएं,परिणाम प्रकाशन और प्रमाणपत्र वितरण तय समय सीमा के भीतर सुनिश्चित करना होगा. जिन संस्थानों में सत्र देरी से चल रहे हैं,उन्हें जल्द सुधारात्मक कार्ययोजना बनाकर लागू करने का निर्देश दिया गया है.
नैक (NAAC)के मानकों के अनुसार विश्वविद्यालयों कोA, B, CऔरDग्रेड दिए जाएंगे. इसके लिए संस्थानों को तय पैरामीटर्स का पालन करना अनिवार्य होगा. बिना नैक ग्रेडिंग वाले संस्थानों को यूजीसी से मिलने वाली फंडिंग और अन्य सुविधाओं में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है.
डिजिटलीकरण को बढ़ावा देते हुए विश्वविद्यालयों को अपने सभी प्रमाणपत्र और अंकपत्र डिजिटल लॉकर में अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं. इससे छात्रों को दस्तावेजों की आसान और सुरक्षित उपलब्धता सुनिश्चित होगी.
इसके अलावा,हर विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध कॉलेजों को कम से कम पांच गांव गोद लेने का निर्देश दिया गया है. इन गांवों में शिक्षा,स्वास्थ्य,स्वच्छता,डिजिटल साक्षरता,महिला सशक्तिकरण और कौशल विकास से जुड़ी गतिविधियां चलाई जाएंगी.
सरकार का मानना है कि इन सुधारों से राज्य के उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता में बड़ा सुधार आएगा और वे राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे.
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट