BIHAR NEWS : बाढ़ का पानी कैसे बनेगा बिहार के किसानों की खुशहाली का आधार, जानने के लिए पढ़ें पूरी स्टोरी
पटना:बिहार के शिवहर निवासी राहुल तिवारी कहते हैं, “आमतौर पर बागमती नदी में पानी अधिक रहता है,जबकि बूढ़ी गंडक में जल की कमी बनी रहती है. बागमती–बूढ़ी गंडक नदी जोड़ परियोजना के तहत बने नए लिंक चैनल से अब शिवहर को बाढ़ से राहत मिलने के साथ सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा. इससे भू-जल स्तर में भी सुधार होगा,जिसका सीधा लाभ किसानों और आम लोगों को मिलेगा.”
राहुल तिवारी की यह खुशी सिर्फ उनकी नहीं है. शिवहर,सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर के लाखों लोग इस परियोजना को अपने जीवन और खेती-किसानी में बदलाव की शुरुआत मान रहे हैं. आखिर यह परियोजना इन जिलों के लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों है और इससे लोगों को क्या-क्या लाभ मिलने वाले हैं?आइए,विस्तार से जानते हैं.
नदी जोड़ो परियोजना भारत की एक महत्वाकांक्षी योजना है,जिसका उद्देश्य अधिक जल वाली नदियों के अतिरिक्त पानी को जल संकट और सूखे से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाना है. इससे बाढ़ की तीव्रता कम करने,सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन का लक्ष्य है.
इसी दिशा में बिहार सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 19 जुलाई 2026 को शिवहर जिले में राज्य की पहली नदी जोड़ो परियोजना का उद्घाटन किया. यह परियोजना राज्य में बाढ़ प्रबंधन,भू-जल स्तर में सुधार और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है.
इस परियोजना के तहत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 130.88 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 68.80 किलोमीटर लंबे बेलवा–मीनापुर लिंक चैनल का उद्घाटन किया. इसके साथ ही बेलवा डैम से बागमती नदी का अतिरिक्त पानी लिंक चैनल के माध्यम से मुजफ्फरपुर के मीनापुर स्थित बूढ़ी गंडक नदी की ओर प्रवाहित किया गया. यह परियोजना बागमती नदी के अतिरिक्त जल को बूढ़ी गंडक नदी तक पहुंचाकर बाढ़ के पानी का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करेगी. साथ ही इससे सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और जल संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग संभव हो सकेगा.
इस अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश में जिस नदी जोड़ो परियोजना की परिकल्पना की थी,उसे आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में धरातल पर उतारा जा रहा है. राज्य सरकार जल सुरक्षा,सिंचाई विस्तार और बाढ़ प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए दीर्घकालिक योजनाओं पर काम कर रही है.
शिवहर जिले के अंतिम छोर पर,पूर्वी चंपारण की सीमा से सटे बेलवा में बने डैम के शुरू होने से शिवहर,सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर जिलों को सीधा लाभ मिलेगा. इस परियोजना से लगभग 50 लाख किसानों को फायदा होने का अनुमान है,जबकि करीब 1.39 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए स्थायी सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित होगी. इससे किसानों को वर्षभर सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा,जिससे खेती अधिक उत्पादक और लाभकारी बनेगी. यह परियोजना सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने के साथ-साथ बागमती नदी में हर वर्ष आने वाली बाढ़ के प्रभाव को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
बागमती-बूढ़ी गंडक लिंक परियोजना से बाढ़ की तीव्रता कम होने के साथ भू-जल स्तर में सुधार होगा तथा सिंचाई प्रबंधन मजबूत होगा,जिससे बेहतर फसल उत्पादन के साथ-साथ किसानों के आय में वृद्धि होगी. यह परियोजना बिहार के जल संसाधनों के समेकित और वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है.
ग्रामीणों की सुनिए
बांध बनने से पहले गांव में पानी की काफी समस्या रहती थी. बाढ़ के अतिरिक्त पानी को लिंक चैनल के माध्यम से बूढ़ी गंडक नदी में प्रवाहित किए जाने से जल निकासी व्यवस्था बेहतर होगी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी का दबाव कम होगा.
निलेश साहनी,शिवहर
पहले बाढ़ से पूरा फसल बर्बाद हो जाता था,अब इससे राहत मिलेगी. यह जल संसाधनों के प्रभावी उपयोग,संतुलित जल प्रबंधन और कृषि विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है.
कलाथर प्रसाद, शिवहर